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निस्वार्थ भाव से सेवा करती हैं बेटियां

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ज्ञानपुर/सुरियावां। ज्ञानपुर नगर स्थित मुखर्जी पार्क में आयोजित श्रीरामकथा में अयोध्या से पधारे स्वामी निर्मल शरण जी महाराज ने कहा कि विवाह में सबकुछ हंसी-खुशी से गुुजरता है, लेकिन एक पल ऐसा भी आता है जब सब की आंखें नम हो जाती हैं, वह है बेटी की विदाई का पल।
उन्होंने कहा कि जिस बेटी का पालन पोषण कर माता-पिता बड़े प्यार से करते हैं वही बेटी पल भर में पराई हो जाती है। बेटी की विदाई में मां को तो कष्ट होता ही है, लेकिन सबसे अधिक कष्ट बेटी के बाप को होता है। क्योंकि बेटी बाप के हृदय पर शासन करती है। उन्होंने कहा कि बेटा स्वार्थी हो सकता है पर बेटियां स्वार्थी नहीं होतीं। वह नि:स्वार्थ भाव से सेवा करती हैं। बेटे संपत्ति का बंटवारा करते हैं, जबकि बेटियां विपत्ति का बंटवारा करती हैं। स्वामी जी ने कहा जिस समय सीता जी की डोली महल के बाहर निकली, जनक जी ने सीता को डोली में देखा तो फूट-फूटकर रो पड़े। मौके पर हीरालाल मौर्य, राकेश दुबे, ब्रह्मजीत शुक्ला, संतोष उमरवैश्य आदि रहे।
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सुरियावां नगर के रामलीला मैदान में आयोजित नौ दिवसीय राम कथा में मंगलवार को काशी कोकिला सुप्रिया पाठक ने भगवान शंकर और मां पार्वती के प्रसंग को आगे बढ़ाया। बताया कि मां पार्वती के विशेष आग्रह पर देवाधिदेव महादेव ने रामकथा की महिमा का व्याख्यान किया। जीवन की खूबसूरती बिना राम के आदर्शों को आत्मसात किए नहीं आ सकती। बिनु सत्संग विवेक न होई... का मार्मिक विवरण देते हुए कहा कि रावण के अत्याचार से दूषित हुई पृथ्वी और ऋषि मुनियों पर बढ़ते अत्याचार से दुखी होकर परमेश्वर राम रूप में धरा पर आए। मानव जीवन के श्रेष्ठतम लक्ष्य के लिए भगवत प्राप्ति का प्रयास होना चाहिए। इसके लिए कर्म मार्ग, ज्ञान मार्ग और भक्ति मार्ग ही है। तीनों में सबसे सरल भक्ति मार्ग है। इस मौके पर किशोर कुमार खटाई, घनश्याम दास, अवधेश कुमार, राधेश्याम गुप्ता, प्रदीप कुमार, गिरजा शंकर आदि रहे।
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