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किसानों संग धोखा, नए रेट पर पुरानी डीएपी

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ज्ञानपुर। अन्नदाताओं को हर तरफ साजिश और समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। पहले ही डीएपी संकट से जूझ रहे किसानों को अब समितियां और किसान सेवा केंद्रों से भी धोखा दिया जा रहा है। कई किसानों को पुरानी डीएपी को नए रेट में बेचने का मामला प्रकाश में आया। शनिवार को भाजपा नेता समेत कई किसानों ने सीएम और पीएम को पत्र भेजकर समितियों, इफको और कृभको के जिलास्तरीय अधिकारियों पर मनमानी का आरोप लगाया। प्रकरण की जांच कराने की मांग की।
रबी और खरीफ सीजन में डीएपी की मांग बढ़ जाती है। जिले में 50 से अधिक समितियों में 15 पहले ही डिफाल्टर घोषित हैं। करीब 35 से 37 समितियों में गिने-चुने पर ही खाद मिल रही है। इसी तरह किसान सेवा केंद्रों पर वर्तमान में 1450 से 1470 रूपये में जहां डीएपी दी जा रही है, वहीं निकी दुकानों पर 1500 से 1600 रूपये दुकानदार किसानों से वसूल रहे हैं। कुछ समितियों पर डंप पुराने स्टॉक को अब नए रेट पर बेचा जा रहा है। वेदपुर के किसान एवं भाजपा नेता उमाशंकर उपाध्याय, रामचंद्र पाल, बाबा पाल, जगदीश कुमार, देवाजितपुर के भोलानाथ उपाध्याय ने कहा कि रबी सीजन में तीन महीने के अंदर डीएपी का रेट 1070 से तीन सौ रूपये बढ़ गया। अब पुरानी डीएपी को भी नए रेट पर बेचा जा रहा है। भाजपा नेता उमाशंकर उपाध्याय ने सीएम और पीएम को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि डीएपी कंपनी के अफसरों की कृपा से कुछ केंद्रो पर मनमानी ढंग से डीएपी का रेट लिया जा रह है। निजी दुकानदारों को फायदा पहुंचाने के लिए मायाजाल फैलाया गया है।
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देश में फास्फोरिक एसिड का उत्पादन नहीं होता। इसे विदेशों से मंगाई जाती है। उसी के हिसाब से रेट बढ़ता है। गेहूं की बुआई के लिए किसान एनपीएस 20:20:13 का भी प्रयोग कर सकते हैं। यह डीएपी से बेहतर होता है। इसमें गंधक भी मिला रहता है, जो फसलों के लिए काफी जरूरी होता है।
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अरविंद सिंह, उप निदेशक कृषि

इफको और कृभको की डीएपी के रेट में किसी भी स्तर से गड़बड़ी नहीं की जाती है। अगर किसी समिति या केंद्र से गलत रेट किसानों से लिया गया है तो संबंधित केंद्र पर कार्रवाई होगी। किसान इसकी शिकायत करे।
एमसी चौरसिया, जिला प्रभारी कृभको
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