सीतामढ़ी। कोईरौना के दुलही की बारी गांव में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा में गंगोत्री हिमालय से पधारे संत डॉ दुर्गेशाचार्य जी ने कथा के चौथे दिन बुधवार को दीपावली के पावन पर्व पर ज्ञान गंगा का दीप प्रज्वलित किया।
आचार्य ने लीलाधारी भगवान की अमृतमयी कथा सुना श्रद्धालुओ को ज्ञान गंगा में गोते लगवाए। भगवान श्री कृष्ण का प्राकट्य करा कर समग्र जनमानस के हृदय को परमानंद से जगमगा दिया। भगवान श्री कृष्ण का जन्म होते ही महिलाओं ने मंगल गीत गाया। कथा सुनाते हुए कहा कि जीवात्मा से जब परमात्मा से साक्षात्कार करता है तभी उसका संपूर्ण शरीर और जीवन परम प्रकाश दिब्य ज्योति से जगमग उठता है। उन्होंने कहा कि आज के भौतिकवादी युग में अर्थ, सुख और भोग को महत्व देने से लोगो का ओज तेज समाप्त हो गया है। कहा गर्मी के सूर्य ताप से जैसे गुलाब पुष्प मुरझा जाता है उसी तरह आज का आनव विषय भोगों के संताप से मानव मुरझा गया। किंतु ताप, पाप, संताप से कलयुग के प्राणियों को मुक्ति दिलाने की परम औषधि श्रीमद्भागवत कथा है। भागवत कथा श्रवण से परम ब्रह्म श्री कृष्ण का प्राकट्य होते ही जीवन आनंद से खिल उठता है। मौके पर विंध्यवासिनी मिश्रा, कलेक्टर पंडित, दिनेश मिश्रा, राम मोहन मिश्रा, श्रीमती गायत्री मिश्रा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।