ज्ञानपुर (भदोही)।
जिले की बहुचर्चित ऐतिहासिक भोरी- महजूदा की कजरी बृहस्पतिवार को परंपरागत तरीके से मनाई गई। कजरी गाते-गाते दो गावों की महिलाएं एक दूसरे को गाली देते हुए चप्पल आदि फेंका। महिला सिपाहियों के हस्तक्षेप से विवाद समाप्त हुआ। इस दौरान लगे मेले में लोगों की भीड़ उमड़ी। कजरी सुनने के बाद लोगों ने खरीदारी की।
भोरी-महजूदा में ऐतिहासिक कजरी को लेकर बृहस्पतिवार सुबह से मेला स्थल पूरी तरह से सज गया। झूले, सर्कस के अलावा मिठाई, फलफूल और खिलौने की दूकानें सज गईं। दोपहर होते-होते मेले में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चों की भीड़ उमड़ चुकी थी। करीब एक बजे से परंपरागत तरीके से कजरी की शुरुआत हुई। भोरी और महजूदा गांव की महिलाएं कजरी गाते-गाते अचानक आक्रामक हो गई। गाने के दौरान ही महिलाएं चप्पल, पत्थर आदि एक दूसरे पर फेंकने लगी। करीब 15 मिनट तक चले विवाद के बाद मामला शांत हुआ। इस दौरान दूरदराज से आए मेलार्थियों ने खरीदारी कर मेले का आनंद लिया। महिलाओं ने जहां घरेलू सामानों के साथ ही मिठाई आदि की खरीदारी की वहीं बच्चों ने झूले का आनंद लिया साथ ही चाट-पकौड़ा भी खाया। सुरक्षा के मद्देनजर मेले में सादे वर्दी में महिला पुलिसकर्मी तैनात रहीं। मेलास्थल से कुछ दूर पुरुष पुलिसकर्मी भी स्थिति पर निगरानी रखे हुए थे। मान्यता है कि दशकों पूर्व एक नाई भोरी गांव में ससुराल आया था। यहां पर कजरी गाने के लिए महिलाओं ने दबाव डाला। न गाने पर उसे दबाकर मार डाला। नाई मरने के बाद दोनों गांव की महिलाओं को परेशान करने लगा। उसी की याद में यह मेला आयोजित होता चला आ रहा है। कौलापुर संवाददाता के मुताबिक धनापुर गांव में कजरी पर मेले का आयोजन किया गया। इसमें बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे पहुंचे। सभी ने खरीदारी करने के साथ ही विभिन्न व्यंजनों का लुत्फ उठाया।
पुरुषों का प्रवेश है वर्जित
ज्ञानपुर। भोरी-महजूदा गांव में प्रत्येक वर्ष होने वाली कजरी मेले में पुरुषों का प्रवेश वर्जित होता है। मेले में सिर्फ महिलाएं और बच्चे ही दिखते हैं। कोई पुरुष भूलकर भी मेले के अंदर प्रवेश नहीं करता।