ज्ञानपुर। गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वर:, गुरु साक्षात्परब्रह्म तस्मै श्रीगुरुवे नम:। गुरु आराधना के पवित्र पर्व गुरु पूर्णिमा पर जिले के गुरु आश्रम भक्ति भाव में लीन नजर आए। हजारों की संख्या में शिष्यों ने अपने-अपने गुरुओं के श्रीचरणों में शीश झुकाए। इस दौरान गुरुजनों ने शिष्यों को जीवन कल्याण की शिक्षा देते हुए परहित के जरिए मानव जीवन के कल्याण का मर्म बताया।
गोपीगंज स्थित अपने निवास पर संत केशव कृपाल महाराज ने शिष्यों को आशीर्वाद देते हुए उन्हें जीवन में मानव धर्म निभाने के लिए प्रेरित किया। मानस की चौपाई करनधार सदगुरु दृढ् नावा... के जरिए जीवन में गुरु के स्थान की अहमियत बताई। कहा कि गुरु ही एक ऐसा संबंध है, जो शिष्य के सुख को देखकर सुखी होता है। संसार में आज भी दूसरों के दुख से दुखी होने वाले लोग तो बहुतायत है, लेकिन शिष्य के सुख में हर्षित होने का गुुण मात्र गुरु में ही होता है। भगवान राम ने मानस में मनुष्य की देह को भवसागर पार करने के लिए एक नौका कहा है और कृपा को नाव के अनुकूल वायु बताया है। जबकि उस नौका को दिशा देने की साधारण भूमिका मल्लाह की है। मानव की देह रूपी नौका के लिए सदगुरु कर्णधार के समान है। इस मौके पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे। सिंहपुर स्थित राधास्वामी धाम आश्रम में गुरु की आराधना के लिए बड़ी संख्या में शिष्य पहुंचे। संत आनंद स्वरूप पांडेय ने शिष्यों को आशीर्वाद प्रदान करने के बाद प्रसाद वितरण कराया। इस मौके पर पूरे दिन भजन-कीर्तन और आशीर्वचन का सिलसिला चलता रहा। इसी तरह पतंजलि योग समिति और गायत्री परिवार की ओर से भी गुरु पूर्णिमा पर कार्यक्रम आयोजित किए गए। पटेल नगर स्थित गायत्री प्रज्ञापीठ और भुड़की प्रज्ञा पीठ पर गायत्री परिवार की ओर से गुरु पूजन कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें बड़ी संख्या में शिष्य उपस्थित रहे।
उड़िया बाबा आश्रम में उमड़ी भारी भीड़
सीतामढ़ी। धार्मिक स्थली सीतामढ़ी में गुरु पूर्णिमा के पुनीत पर्व पर संत उड़िया बाबा आश्रम में गुरु पूजन के साथ विविध धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। इस मौके पर शिष्यों ने आस्था और श्रद्धा से गुरु चरणों में शीश नवाकर आशीर्वाद लिया। साथ ही गुरु के बताए मार्गों पर जीवन पर्यंत चलने का वचन दिया। भक्तों ने आश्रम में चल रहे अखंड श्रीहरि संकीर्तन में शामिल हो जीवन को धन्य किया और भंडारे में प्रसाद ग्रहण किया। रविवार को संत उड़िया बाबा आश्रम में सुबह से ही भक्तों का आगमन शुरू हो गया। 125 वर्षीय संत श्री उड़िया बाबा के दर्शन पूजन के लिए शिष्यों का हुजूम उमड़ पड़ा। भक्तों ने संत उड़िया बाबा का विधिविधान से पूजन किया। अपने आशीर्वचन में संत ने कहा कि आषाढ़ पूर्णिमा को वेदव्यास जी का अवतरण हुआ था। वेद व्यास भगवान ने ही वेद पुराणों की रचना की और ईश्वर और मनुष्य के बीच सेतु बने। इसीलिए आषाढ़ पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। इसी तरह, महर्षि वाल्मीकि आश्रम में महंत हरिप्रसाद शास्त्री का शिष्यों ने दर्शन पूजन किया। बाबा धवासा नाथ आश्रम में महंत अमरदास जी महाराज का दर्शन पूजन किया। मठहा गांव में आचार्य डॉक्टर शिवपूजन शुक्ल के यहां शिष्यों का सुबह से ही आना-जाना लगा रहा।
अर्जुनपट्टी के संत की एक झलक पाने की दिखी बेताबी
औराई। ज्ञानमय शंकररूपी गुरु की वंदना और उनकी एक झलक पाने के लिए हजारों की भीड़ क्षेत्र के अर्जुनपट्टी आश्रम पर विराजमान संत लक्ष्मण दास जी महराज के यहां दौड़ पड़ी। आश्रम के चारों ओर से अपने गुरु की एक झलक पाने के लिए लोगों का रेला दौड़ा चला आ रहा था। भीड़ देखकर ऐसा लग रहा था कि लोग गुरु के चरणों में गिरकर भक्ति के सारे खजाने को आत्मसात कर लेना चाहते हैं। उधर, संत लक्ष्मणदास ने शिष्यों को आशीर्वाद दिया और अपने हाथ से प्रसाद वितरण किया। बड़ी संख्या में भक्त गुरु के दर्शन के लिए जहां एक दिन पहले ही आश्रम में पहुंच गए थे, वहीं जिले के अलावा अन्य जनपदों के लोगों का आवागमन भी सुबह से ही शुरू हो गया था। महिलाओं और बच्चों की अधिक उपस्थिति के चलते पूरा आश्रम भीड़ से पट गया था। आश्रम में जहां एक ओर रामचरित मानस पाठ, भक्ति गीत और भंडारा चल रहा था, वहीं आश्रम के बाहर तरह की दूकानों पर लोगों की भीड़ ने मेले का नजारा बना दिया था। सुबह से देर रात तक संत लक्ष्मण दास महाराज ने शिष्यों को प्रसाद और आशीर्वाद दिया।