इससे आसपास की सैकड़ों एकड़ भूमि सिंचाई के अभाव में बंजर हो गई तो कुछ स्थानों पर किसान निजी पंपिग सेट के सहारे किसान खेती करने को विवश हैं।
ग्रामीण इलाकों में किसान नहर, राजकीय नलकूपों से ही ज्यादातर फसलों की सिंचाई करते हैं, लेकिन जिले में मामूली खामियों और देखरेख के अभाव में 150 से अधिक राजकीय नलकूप खराब पड़े हैं।
औराई के जाठी स्थित नलकूप संख्या 173 जहां विभागीय उदासीनता के चलते आठ साल से बंद है, वहीं सुरियावां के तेजसिंहपुर का नलकूप पांच साल से दुरुस्त ही नहीं हो सका।
कमोबेश यही स्थिति पूरे जिले में राजकीय नलकूपों की बनी हुई है। जो नलकूप सही हैं, उनकी नाली आधी-अधूरी है। इससे रबी और खरीफ सीजन में सिंचाई के लिए किसानों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में स्थापित 565 राजकीय नलकूपों में 150 से अधिक खराब पड़े हैं। इनमें 80 फीसदी नलकूप ऐसे हैं, जिसमें केबल बर्स्ट होने, स्टार्टर खराबी, मोटर जलने और बोरिंग ध्वस्त होने की समस्या है।