ज्ञानपुर। शासन-प्रशासन की सख्ती का असर निर्माण एजेंसियों पर नहीं पड़ रहा है। इसके चलते 150 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं के कार्यों की रफ्तार सुस्त है। 2020-21 में हैंडओवर होने वाली कई परियोजनाएं अब तक पूरी नहीं हो सकीं। प्रशासन के लिए इनको पूरा कराना किसी चुनौती से कम नहीं है। जिले में स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, लघु सेतु, पेयजल, बिजली की 50 से अधिक और कुल 250 करोड़ से ज्यादा लागत की परियोजनाओं का काम चल रहा है। निर्माण एजेंसी समाज कल्याण, लोक निर्माण, राज्य सेतु निगम को इनको पूरा कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें से कुछ परियोजनाओं का लोकार्पण हो चुका है, लेकिन काम पूरा नहीं हो सका है। चकगुमानी में 17 करोड़ की लागत से आश्रम पद्धति विद्यालय का काम वर्ष 2013-14 में शुरू हुआ। 2016 तक उसे हैंडओवर होना था, लेकिन छह साल बाद भी वह पूरा नहीं हो सका। सुरियावां, ज्ञानपुर सहित चार थानों में बैरक और आवास का काम अभी भी अधूरा है। पेयजल योजना, पशु पाली क्लीनिक आवास, लघु सेतु सहित 150 करोड़ की परियोजनाओं के कार्यों की रफ्तार सुस्त है। औराई में पालिटेक्निक भवन, आईटीआई भवन, दुर्गागंज में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, ब्लॉक कार्यालय आदि का निर्माण लटका है। सरपतहां का 100 शैय्या अस्पताल और न्यायालय भवन का समय से निर्माण भ्रष्टाचार के कारण नहीं हो सका। अस्पताल में करीब आठ करोड़ जबकि न्यायालय भवन में चार करोड़ की अनियमितता सामने आई है। अस्पताल निर्माण की जांच एसआईटी कर रही है। अभी दो दिन पूर्व डीएम आर्यका अखौरी ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में एकेडमिक सेंटर और कक्ष निर्माण में अनियमितता पकड़ी है। वीरमपुर स्थित आश्रम पद्धति विद्यालय भवन का निर्माण करीब-करीब पूर्ण हो चुका है। स्कूल परिसर में गुजरे हाईटेंशन तार को हटाने और कनेक्शन के लिए धनराशि दी गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी। जिला समाज कल्याण अधिकारी महेंद्र यादव ने कहा कि जब तक विद्युत कनेक्शन नहीं हो जाता है, तब तक उसे हैंडओवर नहीं किया जाएगा। विद्युत विभाग की लापरवाही के चलते अभी तक भवन हैंडओवर नहीं किया जा सका। हर महीने लंबित परियोजनाओं की समीक्षा डीएम कर रही हैं। कार्यदायी संस्थाओं पर कार्रवाई भी की जाती है। कुछ विकास कार्य बजट की कमी से भी रुके हैं। - संतोष कुमार, जिला अर्थ एवं संख्या अधिकारी