भदोही। काउंसिल फार लेदर एक्सपोर्ट्स (सीएलई) की क्षेत्रीय निदेशक पल्लवी दूबे ने कहा कि चमड़ा उद्योग उत्तरोत्तर प्रगति कर रहा है। इसका अंदाजा इस बात से लग सकता है कि गत 6 वर्षों में परिषद की सदस्य संख्या 2188 से बढ़ककर 3350 पहुंच गई। कहा कि चमड़े से बने आकर्षक हस्तनिर्मित वस्तुओं की पूरी दुन-ियां में मांग है। कहा कि जो कालीन लोग कालीन उत्पादन में लगे हैं उनके लिए चमड़े के व्यवसाय में आना बेहद आसान है। वे शुक्रवार को अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) सभागार में कालीन उत्पादकों को संबोधित कर रही थी
उन्होंने कहा कि कालीन उद्योग के जैसे ही भारत सरकार चमड़े से बने वस्तुओं के निर्यात पर जोर दे रहा है। मार्केट डेवलपमेंट स्कीम के तहत पूरी दुनियां में भारतीय चर्म वस्तुओं का प्रमोशन कर रही है साथ ही सहायता भी प्रदान करती है। 3 प्रतिशत ड्यूटी फ्री इमपोर्ट स्कीम के बारे में भी बताया जिसके तहत निर्यातकों की सहायता की जाती है।
कहा कि कालीन निर्माण करने वालों के लिए यह और भी आसान है।
बताया कि सीएलई का सदस्य बनना आसान होने के साथ साथ सदस्यों को पूरी सहायता प्रदान की जाती है। पांच वर्ष के लिए सदस्यता प्रदान की जाती है। अपने सदस्यों को हम वैश्विक रूप से चमड़े के वस्तुओं के निर्यात में शासन से मिलने वाली सहायता उपलब्ध कराते हैं। सरकार का जोर है कि मझोले निर्माताओं को पूरी सहायता दी जाए।
चमड़ा उद्योह को बढ़ावा देने के लिए देश में पांच जोन बनाए गए हैं। सेंट्रल जोन का मुख्यालय कानपुर में है जिसमे यूपी, एमपी व बिहार प्रदेश आते हैं। सेंट्रल जोन अकेले 6 हजार करोड़ के चमड़ा सामग्री निर्यात करती है।
सेमिनार को परिषद के क्षेत्रीय अध्यक्ष जावेद इकबाल ने भी संबोधित किया। मुख्य रुप से हाजी शाहिद हुसैन, वेद प्रकाश गुप्ता, राजा राम गुप्ता, अब्दुल हादी अंसारी, इश्तियाक खां, जेपी गुप्ता, इम्तीयाज अंसारी, एचएन मौर्य, शाहिद अली, सुजीत जायसवाल, लोलारख नाथ तिवारी उपस्थित रहे।