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42 साल बाद परिजनों से मिलेंगे मुरलीधर

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औराई। 10 वीं में फेल होने के बाद पिता की डांट की डर से घर छोड़ चुके मुरलीधर का आखिरकार 42 साल बाद पता चल गया। उनके कोटा में होने की जानकारी मिलने पर परिजनों खुशी की लहर है। कोटा की एक स्वयंसेवी संस्था के संरक्षण में रह रहे मुरलीधर को लेकर उनके बड़े भाई और परिवारीजन कोटा से लेकर गांव पहुंच रहे हैं।
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औराई थानाक्षेत्र के सहसेपुर गांव निवासी मुरलीधर दुबे पुत्र सदानंद दुबे हाईस्कूल की परीक्षा में फेल होने के बाद पिता की डांट की डर से 42 वर्ष पहले घर छोड़कर चले गए थे। उस समय उनकी उम्र 15 वर्ष थी। घरवालों ने काफी खोजबीन की, लेकिन उनका कुछ पता नहीं चला। बताते हैं कि पुत्र के गम में ही उनके पिता की मृत्यु हो गई। गुमशुदा बच्चों की बरामदगी के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को उनके राजस्थान में होने की जानकारी मिली। बताया जाता है कि मुरलीधर दुबे कुछ दिन पहले राजस्थान के कोटा में बीमार हालत में सड़क पर लावारिस पाए गए थे। लावारिस लोगों की सेवा करने वाली संस्था ‘अपना घर आश्रम’ एअरोड्रम चौराहा कोटा राजस्थान के सरंक्षण में रह रहे थे। इनके भाई शेषधर दुबे को सूचना देकर पुलिस ने परिजनों को कोटा भेजा। वहां से कानूनी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद घरवाले उन्हें लेकर औराई रवाना हो गए। इधर घरवाले 42 साल बाद लापता मुरलीधर के घर पहुंचने की बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।

खुशी से चमक उठीं बूढ़ी मां की आंखें
औराई। 42 वर्ष से बेटे के इंतजार में बैठी मां बसंती देवी के चेहरे पर खुशी देखने लायक थी। कहा कि 1975/76 की बात है, जब वह हाईस्कूल में फेल हो गया था और डांट के बाद घर छोड़कर चला गया। कुछ दिनों के बाद आया था, लेकिन फिर चला गया और फिर नहीं लौटा। मुरलीधर तीन भाइयों में तीसरे नंबर पर हैं। बड़े भाई शरदकांत पशुपालन विभाग में कर्मचारी हैं। उनके बाद निशिकांत बाहर रहते हैं। मुरलीधर का घर का नाम तुषारकांत है। इनके पिता प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाचार्य के पद से रिटायर होने के कुछ वर्ष बाद गोलोकवासी हो गए। भरी आंखों से उन्होंने कहा कि अगर घर पर रहा होता तो आज उसका भी परिवार होता।
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