ज्ञानपुर। गरीबों को आशियाना उपलब्ध कराने के लिए केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री आवास योजना भी धांधली की भेंट चढ़ गई है। वित्तीय वर्ष 2016-17 और 2017-18 में करीब 500 अपात्रों को प्रथम किश्त की दो करोड़ जारी कर दिया गया। सत्यापन में गड़बड़ी मिलने के बाद उन्हें नोटिस जारी कर पैसे वापस करने को कहा गया। करीब छह-सात माह बाद भी 100 अपात्रों ने ही सरकारी पैसा वापस किया। अब भी 400 अपात्रों से डेढ़ करोड़ की रिकवरी लटकी हुई है, हालांकि प्रशासन का दावा है कि वसूली प्रक्रिया जारी है। अपात्रों से वसूली के लिए आरसी जारी की जाएगी।
केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद गरीबों को छत मुहैया कराने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना की शुरुआत की गई। इसके तहत वित्तीय वर्ष 2016-17 में 5,981 और वित्तीय वर्ष 2017-18 में 4, 560 आवासों का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसमें चयनित लाभार्थियों को प्रति आवास के निर्माण के लिए 1,20 लाख रुपये उपलब्ध कराया जाता है। इसमें तीन किश्तों में उन्हें रकम दी जाती है। जिसमें पहली किश्त 40 हजार चयन के बाद ही भेज दिया गया। शुरुआती दौर में प्रधानों, सचिवों और विभागीय आला अधिकारियों के तालमेल से गाइडलाइन को ताक पर रखकर अपात्रों को आवास आवंटित कर दिया गया। प्रधानमंत्री आवास को अपात्रों को आवंटित करने की आए दिन मिल रही शिकायत को तत्कालीन जिलाधिकारी विशाख ने गंभीरता से लिया था। आवासों के सत्यापन में पाया गया कि जिले में 500 अपात्रों को आवास आवंटित कर दिया गया था। इसमें से अधिसंख्य अपात्रों ने खाते से धनराशि भी आहरित कर लिया गया था। अकेले विकास खंड डीघ में 130 अपात्र और अभोली में 100 से अधिक अपात्र मिले थे। महकमे की लापरवाही के चलते अपात्रों से अभी तक वसूली की कार्रवाई नहीं की जा सकी है। सूत्रों की मानें तो शुरुआती दौर में नोटिस तो दी गई थी लेकिन बाद में अधिकारियों की कृपा से इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। धीरे-धीरे आठ माह से अधिक का समय बीत गया लेकिन अपात्रों से सरकारी धन की वसूली नहीं हो सकी।
अपात्रों से रिकवरी का प्रयास किया जा रहा है। सभी को नोटिस भेजी गई जिसमें 100 से अधिक अपात्रों ने सरकारी पैसा वापस कर दिया हालांकि कई अपात्र अब तक वापस नहीं किए। तीन नोटिस भेजी जाएगी और उसके बाद सभी के खिलाफ आरसी जाएगी।
मनोज राय, परियोजना निदेशक डीआरडीए