ज्ञानपुर। जिलाधिकारी विशाख जी की मेहनत आखिरकार रंग लाई। कान्वेंट स्कूलों को मात दे रहे प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय जोरईं ने आखिरकार अपनी पहचान सूबे तक पहुंचा दी। लखनऊ में आईएएस वीक में डीएम के कार्यों को सराहा गया। दशकों पूर्व प्राथमिक और पूर्व माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले लोग आईएएस, पीसीएस से लेकर विभिन्न उच्च पदों पर पहुंचे, लेकिन शैक्षिक व्यवस्था में गिरावट होने से करीब दो दशकों से सरकारी स्कूलों को पठन-पाठन के लिए लिहाज से बेहतर नहीं माना जा रहा है। जिले के कुछ सरकारी स्कूलों ने आधुनिक तरीके से शिक्षा देनी शुरू की तो लोगों का नजरिया भी बदलने लगा। जिलाधिकारी विशाख जी ने इसको धार देते हुए जिले के छह ब्लॉकों के 30 विद्यालयों को मॉडल बनाने के लिए चयनित किया। सभी स्कूलों में कामकाज चल रहा है, लेकिन प्राथमिक एवं पूर्व माध्यमिक विद्यालय, जोरईं 90 फीसदी से अधिक बनकर तैयार हो चुके हैं। इस स्कूल में बच्चों को सरल भाषा में विज्ञान की जानकारी संग स्टेम लैब की व्यवस्था की जा रही है। आधुनिक शौचालय, साफ-सफाई संग बेहतर शिक्षा भी बच्चों को दी जा रही है। प्रधान प्रतिनिधि जोरईं रामधनी यादव ने कहा कि जोरई मॉडल स्कूल को सूबे का सबसे बेहतर विद्यालय बनाने का प्रयास किया जाएगा। जिलाधिकारी के अथक प्रयास को बेहतर करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी।