जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से उच्चतम न्यायालय के निर्देश पर जिले
में महीने भर से अधिक समय तक तैयारी के बाद दीवानी न्यायालय परिसर में
आयोजित राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत में रिकार्ड 13 हजार 740 मुकदमें
निस्तारित किए गए।
मुकदमों का निस्तारण कर चार लाख 28 हजार 690 रुपया
अर्थदंड वसूला गया। मृतकाश्रितों को क्षतिपूर्ति 71 लाख 47 हजार 338 रुपये
दिलाए गए। वहीं उत्तराधिकार के मामले में कुल एक करोड़ दो लाख 47 हजार 918
रुपये का प्रमाण पत्र निर्गत किया गया।
इसके अलावा बैंकों के ऋण रिकवरी के
मामलों में तीन करोड़ चार लाख 72 हजार 64 रुपये समझौता राशि तय की गई।
उपरोक्त
निस्तारित मामलों में जिला जज ओम प्रकाश अग्रवाल की अदालत ने मोटर
दुर्घटना के 29 मामले में 46 लाख 68 हजार क्षतिपूर्ति, विद्युत के 61 मामले
में एक लाख 59 हजार अर्थदंड, एनडीपीएस के दो मामले में 20 हजार रुपये
अर्थदंड लगाए गए।
परिवार न्यायाधीश अनिरूद्घ मौर्य ने वैवाहिक के 23, भरण
पोषण के 22 और पांच अन्य मामले निस्तारित किए।
एडीजे प्रथम अखिलेश पांडेय
ने सात, एडीजे द्वितीय ने पांच, अशोक दुबे ने एक, एडीजे त्वरित चंद्रोदय ने
तीन, सीजेएम सत्यवान सिंह ने 1071, सिविल जज सीडि.प्रवीण कुमार पांडेय ने
सिविल के 21, सेक्शन के 23 मामले निस्तारित करके एक करोड़ दो लाख 47 हजार
918 रुपये का उत्तराधिकार प्रमाण पत्र निर्गत कर 265 अन्य मामले निस्तारित
किए।
इसी तरह सिविज जज परवेज अख्तर ने आपराधिक के 757, शरद चौधरी ने 562,
समर्थ अग्रवाल ने 322 मामले निस्तारित किए, अपर सिविल जज सीडि. प्रथम
कमलकांत श्रीवास्तव 11 मामले, अपर सिविल जज सीडि.ने चंद्रमोहन मिश्र ने 20
मामले
, सिविल जज जूडि. सुशील वर्मा ने 566 मामले, अपर सिविल जज जूडि. रत्नम
श्रीवास्तव ने छह मामले, पवन कुमार सिंह ने पांच मामले निस्तारित किया।
इसके
अलावा जिले के प्रशासनिक और राजस्व अधिकारियों की अदालत ने 4177 मामलों को
निस्तारित किया। इसके पूर्व राष्ट्रीय मेगा लोक अदालत शुभारंभ जिलाजज ओपी
अग्रवाल ने सरस्वती चित्र पर दीप प्रज्वलित, फीता काटकर किया।
इस मौके पर
जिलाधिकारी प्रकाश बिंदू समेत न्यायिक, प्रशासनिक अधिकारी, शासकीय अधिवक्ता
आदि मौजूद रहे।