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Bhadohi News: सड़क पर बिना हाई सिक्योरिटी नंबर दौड़ रहे सवा लाख वाहन, सुस्त चालान अभियान

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। जिले में सवा लाख से अधिक पंजीकृत वाहन बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। इनमें अफसरों के वाहन भी शामिल हैं। परिवहन विभाग प्रतिदिन ऐसे 10 से 20 वाहनों का चालान करने का दावा कर रहा है, लेकिन कानून का पालन कराने वाले अधिकारी खुद इसका खुलेआम उल्लंघन करते देखे जा रहे हैं।
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चोरी और जालसाजी की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए शासन ने साल 2020 में दुपहिया, चार पहिया सहित अन्य वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का निर्देश दिया। हालांकि कोविड महामारी के कारण इसे दो साल तक बढ़ाया गया। परिवहन विभाग के मुताबिक जिले में पांच लाख दुपहिया और चारपहिया वाहन पंजीकृत है। वाहनों में एचएसआरपी लगवाने के लिए फरवरी 2023 तक समय सीमा बढ़ाई गई। अब तक तीन लाख पचहत्तर हजार वाहन ही एचएसआरपी से लैस हो पाए हैं। वहीं अब तक एक लाख 25 हजार से अधिक ऐसे वाहन हैं जिनपर एचएसआरपी नहीं लगा है। सबसे मजे की बात यह है कि विकास भवन, कलेक्ट्रेट और स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारियों के वाहनों में भी यह नंबर नहीं लग सका। नियम के मुताबिक बिना हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट के वाहन चलाने पर जुर्माना लगना चाहिए। सरकार की ओर से सभी प्रकार के पुराने व नए वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (एचएसआरपी) लगाना अनिवार्य कर दिया गया है, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में ऐसे वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
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ऑनलाइन प्रक्रिया अपनाकर खुद बदलवा सकते हैं नंबर प्लेट

हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी करके आसानी से बदलवाया जा सकता है, क्योंकि नियम के उल्लंघन पर पांच से दस हजार रुपये तक जुर्माना लगता है। जानकारों के मुताबिक पुराने नंबर प्लेट को बदलने के लिए बुक माई एचएसआरपी पर लाॅगिग कर नंबर प्लेट बदला जा सकता है। चार पहिया वाहनों के लिए लगभग 1100 से 1200 रुपये तथा दो पहिया वाहनों के लिए लगभग 400 से 500 रुपये किसी भी यूपीआई से ऑनलाइन जमा करना होता है।
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कैसे बनता है हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट

ज्ञानपुर। हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट्स को एल्यूमिनियम से बनाया जाता है। इन पर एक होलोग्राम भी लगा होता है, जो क्रोमियम आधारित होता है। एक प्रकार के स्टीकर की तरह दिखाई देने वाले होलोग्राम के अंदर वाहन की पूरी जानकारी होती है। हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट पर सुरक्षा के लिए यूनिक लेजर कोड भी प्रिंट होता है। हर वाहन के लिए अलग कोड दिया जाता है। इसे आसानी से हटाया नहीं जा सकता। इस नंबर प्लेट की खासियत यह होती है कि अगर ये एक बार टूट जाए तो फिर इसे जोड़ा नहीं जा सकता। इसके साथ ही इस प्लेट को काफी अलग तरीके से बनाया जाता है, जिससे कोई भी इसे कॉपी कर नकली प्लेट नहीं बना सकता।

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सात से आठ हजार वाहनों का हो चुका है चालान: एआरटीओ
ज्ञानपुर। एआरटीओ राम सिंह ने बताया कि जिले में लगभग पांच लाख कुल वाहन पंजीकृत हैं। इनमें पौने चार लाख वाहनों पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट लग चुका है। बाकी के लिए लोगों को जागरूक किया जा रहा है। प्रतिदिन ऐसे 10-20 वाहन चालान भी किए जाते हैं। जिन पर हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट नहीं होता है। जो लोग अपने वाहनों का नवीनीकरण कराने आ रहे हैं, उनसे भी ऑनलाइन आवेदन कराया जा रहा है। ये नंबर प्लेट सभी प्रकार के वाहनों पर लगवाए जाएंगे। अब तक सात से आठ हजार वाहनों का चालान किया जा चुका है।
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