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Bhadohi News: राजकीय स्कूलों में शिक्षकों के 122 पद खाली

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ज्ञानपुर। राजकीय हाईस्कूल एवं इंटर कॉलेजों में शैक्षिक व्यवस्था में सुधार की कवायद धरातल पर फेल हो चुकी है। 122 शिक्षकों और प्रवक्ताओं की कमी के कारण छात्र-छात्राओं को बेहतर शिक्षा नहीं मिल पा रही है। तीन से चार शिक्षकों पर आठ से नौ विषय पढ़ाने की जिम्मेदारी है। शिक्षकों की कमी के कारण छात्र-छात्राओं की संख्या में भी कमी आ रही है।
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करीब डेढ़ दशक पूर्व ग्रामीण अंचलो में आठवीं तक की पढ़ाई के बाद छात्राओं को हाईस्कूल में दाखिले के लिए दूर-दराज के स्कूलों में जाना पड़ता था। इसे देखते हुए तत्कालीन माध्यमिक शिक्षा मंत्री रंगनाथ मिश्र ने 33 पूर्व माध्यमिक स्कूलों को उच्चीकृत राजकीय हाईस्कूल का दर्जा दिया गया। भवन-लैब निर्माण संग अन्य संसाधनों को पूरा करने के लिए प्रति स्कूल को 57-57 लाख रुपये भी मिले। उस दौरान सभी स्कूलों में भवन तो बन गए, लेकिन छात्र-छात्राओं की संख्या के अनुपात में शिक्षकों की तैनाती नहीं हो सकी। वर्ष 2009-10 से शिक्षकों की कमी आज 2024-25 में भी पूरी नहीं हो सकी। इससे स्कूलों में पठन-पाठन कमजोर हो रहा है। स्थिति यह है कि किसी स्कूल में तीन तो किसी में चार के भरोसे ही स्कूल की कक्षाएं चल रही हैं। इसका असर भी पढ़ाई पर दिख रहा है। स्कूलों में प्रवेश के लिए उत्साहित होने वाले छात्र-छात्राएं दूसरे स्कूलों की ओर रुख करते हैं।



इनसेट

कितने शिक्षकों की होनी थी तैनाती

राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान शुरू होने के बाद शिक्षकों की तैनाती के गाइडलाइन भी जारी भी किए जा चुके थे। गाइड लाइन के अनुसार हर स्कूल में प्रधानाध्यापक सहित आठ शिक्षक एवं शिक्षणेतर कर्मचारियों की तैनाती की जानी थी, हालांकि कहीं भी इसे पूरा नहीं किया जा सका। तीन, चार और पांच शिक्षकों के सहारे ही स्कूल चल रहे हैं।
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शिक्षकों की स्थिति

स्कूल स्वीकृत पद तैनाती

33 राजकीय हाईस्कूल 264 142

राजकीय इंका महराजगंज 18 09

राजकीय इंका जगन्नाथपुर 17 05

वीएनजीआईसी इंका ज्ञानपुर 85 28



वर्ष छात्र संख्या

2023 3950

2022 4122

2021 4426



कोट

राजकीय स्कूलों में शिक्षकों की कमी कई सालों से चली आ रही है। पूर्व की अपेक्षा सहायक अध्यापकों की संख्या बढ़ी है। शिक्षकों की कमी के बारे में हर साल लिखकर निदेशालय भेजी जाती है।
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- विकायल भारती, डीआईओएस
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