फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ईमानदारी की भक्ति से प्रसन्न होते हैं भगवान

विज्ञापन
विज्ञापन

विज्ञापन
मोढ़। क्षेत्र के चकभवानीदास-मोढ़ गांव में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के दूसरे दिन कथावाचक कर्मयोगी पं. प्रमोद शास्त्री ने कहा कि ईमानदारी की भक्ति से ही भगवान को प्रसन्न किया जा सकता है। दिखावेपन की भक्ति अधर्म की ओर ले जाती है।
विज्ञापन

उन्होंने कहा कि एक ही व्यक्ति के भिन्न-भिन्न परिस्थितियों में धर्म अलग हो जाता है, जिसे हम पुत्रधर्म, पितृधर्म, भातृधर्म, पतिधर्म, पत्नीधर्म, मित्रधर्म आदि से जानने लगते हैं। सही मायने में मनुष्य ईमानदारी से धर्म का पालन कर लिया तो परमधर्म की ओर अग्रसर हो जाता है। परीक्षित-दिग्विजय प्रसंग को सुनाते हुए कहा कि कलि के प्रभाव से धर्म तीन चरणों में बंट गया था, अब मात्र दानधर्म पर निर्भर है। दान करने से धर्म का पालन होता है चाहे वह श्रमदान हो या फिर अन्नदान, द्रव्यदान या मतदान। दान शब्द का मतलब होता है कि बिना कुछ लिए देना, लेकिन आज के समय में लोग मत भी लेनदेन करके ही करते हैं जो गलत है। अंत में सेवाकांत यादव, सुभाष दुबे, राजीव गोयल आदि ने प्रसाद वितरित कराया।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें