ज्ञानपुर। स्वच्छता मिशन के तहत डीघ ब्लॉक के गावों में लाखों खर्च कर बने शौचालय अनुपयोगी साबित हो रहे हैं। कई गावों में तीन से चार महीने में ही गड्ढे बैठ गए तो कई स्थानों पर सीट खराब हो चुकी है। इससे निर्माण के मानक पर ही सवाल खड़े हो चुके हैं। कई गावों की जांच तो अब भी चल रही है।
स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांव से लेकर शहर तक युद्ध स्तर पर शौचालय का निर्माण हुआ। डीघ ब्लॉक के कुल 98 ग्राम सभाओं में परिवारों को चिन्हित कर 12 हजार रुपये सहायता राशि दी गई। शौचालयों का निर्माण कराकर जीयो टैगिंग भी करा दी गई। बावजूद इसके लाभार्थी शौचालयों का उपयोग करने से कतरा रहे हैं। दरवांसी गांव का हो या रजमला, बसहीं, ऊंज-मुंगरहां, गोधना, चंदापुर, कटरा, धनतुलसी, छेछुआं, इटहरा, कलिक मवैया, बारीपुर, मझगवां, खरगापुर, मैलौना, जंगलपुर, कूड़ीखुर्द, कूड़ीकला आदि का। हर जगह ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों की कमीशनखोरी के चलते निर्माण सही नहीं हो सका। यहां तक किसी के गड्ढे बने भी हैं तो वह पट चुके हैं। अधिक संख्या में बिना गड्ढे वाले शौचालयों की स्थिति तीन महीने में ही जर्जर अवस्था में पहुंचने लगी है। आरोप मढ़ा जा रहा है कि बनने के बाद किसी भी अधिकारी ने यह जानने तक की जहमत नहीं उठाई कि हकीकत क्या है। बार-बार उक्त गांवों के लाभार्थी जिला स्तरीय अधिकारियों को शिकायती पत्र भी सौंप चुके हैं लेकिन अब तक जांच का आश्वासन ही दिया गया। चंदापुर, डीघ समेत कई गावों की जांच अब भी चल रही है।