जंगीगंज। काशी-प्रयाग के मध्य स्थित सेमराधनाथ गंगातट की मखमली रेत पर चल रहे माघ कल्पवास में शनिवार को करते हुए साध्वी डॉ.साधना त्रिपाठी ने कहा कि वीरता के साथ विनम्रता भी पूज्यनीय होता है। धनुष यज्ञ में तीन महापुरुषों के बीच राम का चरित्र प्रकाशित होता है। विश्वामित्र, जनक और परशुराम। जब अनेक शक्तिशाली राजपुरुष धनुष तोड़ने में असफल होते हैं तो जनक का निराश गहरा जाता है। जनक और सुनैना व्याकुल हो उठते हैं। सीता प्रार्थना में लीन रहती हैं। राम स्वयंवर के भाव से नहीं बल्कि यज्ञ के भाव से उपस्थित रहते हैं। विश्वामित्र कहते हैं कि उठो राम और धनुष तोड़ जनक का परिताप मिटाओ। धनुष टूटते ही चिर-परिचित मुद्रा में परशुराम प्रकट होते हैं। धनुष यज्ञ राम के जीवन का सर्वोच्च प्रसंग है। राम का चरित्र यहां यह बताता है कि वीरता के साथ विनम्रता का गुण होना ही चाहिए। वह कठोरता या दंभ नहीं दिखाते, परशुराम के आवेश को अपने मृदुल बोल-व्यवहार से शांत करते हैं। यह राम की महानता का विलक्षण प्रसंग है। इस मौके स्वामी राम शंकर दास, ग्राम प्रधान रामबली सिंह, दिनेश पांडेय, बालेश्वर अग्रवाल, पंचम सिंह, बीरबहादुर सिंह, महाबीर यादव, अशोक कुमार आदि मौजूद रहे।