ज्ञानपुर।
गत दिनों हुई ओलावृष्टि और पहाड़ी क्षेत्रों में शुरू बर्फबारी के असर ने मैदानी इलाकों में लोगों को हांड़ कंपा देने वाली ठंड का अहसास करा दिया है। बुधवार को आठ किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलीं सर्द हवाओं ने कंपकंपी छुड़ा दी। पहले की अपेक्षा ठंड में कमी आने की सोच रखने वाले अलाव और गर्म कपड़ों की शरण लेकर बचते दिखे। बुधवार को जिले का न्यूनतम तापमान 7 डिग्री तक पहुंच गया।
बुुधवार को खिली तेज धूप भी सर्द हवाओं के आगे फीकी नजर आई। पूरे दिन तक हर कोई गलन बढ़ने की चर्चा में मशगूल रहा। ज्यों-ज्यों ठंड का सीजन समाप्ति की ओर बढ़ रहा है, वैसे-वैसे ठंड के तेवर तल्ख हो रहे हैं। बुधवार को सर्द हवाओं के बीच तापमान लुढ़क गया। जिले का अधिकतम तापमान जहां 21 डिग्री रहा, वहीं न्यूनतम तापमान सात डिग्री पर पहुंच गया। इससे सामान्य जनजीवन बेपटरी हो गया। लोग दिनचर्या की शुरुआत देर से करते दिखे। सुबह से शाम तक ठंड से बचने की जुगत में ही समय व्यतीत हो जा रहा है। बावजूद इसके शाम ढलते ही लोग अलाव और घरों में दुबकने को विवश हो उठे हैं। मकर संक्रांति का खुमार उतरते ही ठंड की मार झेलने वाले बाजारों में पहुंचकर गर्म कपड़े आदि की खरीदारी करते नजर आने लगे हैं, तो वहीं दुकानदार भी मौसम
मौसमी बीमारियां भी ढा रहीं सितम
ठंड बढ़ने से जहां मौसमी बीमारियों की चपेट में आकर लोग सरकारी और निजी अस्पतालों की शरण लेते रहे हैं। निजी के साथ-साथ सीएचसी और सरकारी अस्पतालों में भी ठंड से पीड़ित हो मरीज पहुंच रहे हैं। खासकर बच्चों को लेकर परिजन अधिक परेशान बने रहे। जबकि युवक, युवतियां, महिलाएं, अधेड़ दर्द, वायरल फीवर, पेटरोग, सर्दी-जुकाम जैसी बीमारियों से निजात के लिए ओपीडी में अपनी बारी आने का इंतजार करते देखे गए। जिला अस्पताल की ओपीडी में बुधवार को 674 पर्चियां कटीं, जबकि 30 लोग इमर्जेंसी में भर्ती कराए गए।
इनसेट
गेहूं फसल के लिए फायदेमंद है ठंड
कृषि विशेषज्ञों का मानना रहा कि ठंड गेहूं फसल के लिए काफी लाभदायक साबित हो रही है। ठंड की रफ्तार इसी तरह रही तो पैदावार में इजाफा होगा। कृषि विज्ञान केंद्र बेजवां के कृषि वैज्ञानिक डॉ. एके चतुर्वेदी ने कहा कि ठंड बढ़ेगी तो गेहूं की फसल की पैदावार बेहतर होगी। दलहनी और तिलहनी फसलों को भी फायदा होगा। बस पाला नहीं गिरना चाहिए।