ज्ञानपुर। उम्र के 60वें पड़ाव पर खड़ी सरपतहां गांव की विधवा फूलवंती देवी को साल भर पूर्व प्रधानमंत्री आवास मिला लेकिन छह महीने से आवास के छत की ढलाई और प्लास्टर का काम लटका हुआ है। यह तो एक बानगी भर है। गांव की विधवा सुधा सिंह, चकटोडर मुसहर बस्ती के आठ से नौ लाभार्थियों के आवास कई माह से अधूरे पड़े हैं। ये सभी तिरपाल और छप्पर में ही ठंड की रात गुजारने को विवश हैं।
शनिवार को अमर उजाला से बातचीत में विधवा फूलवंती देवी की आंखें नम हो गईं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की योजना को उन्होंने सराहा पर प्रशासनिक प्रक्रियाओं के मकड़जाल से अधूरे आवास को लेकर नाराज दिखीं। उन्होंने कहा कि घर में कोई नहीं है। एक छप्पर में रहती हूं। साल भर से पक्के घर में जाने की उम्मीद लगाए बैठी हूं। तीन किस्तों में आवास की रकम प्रधान ने निकलवा लिया पर अब तक आवास नहीं मिल सका।
यही हाल गांव की विधवा सुधा सिंह का है। कहने को तो आवास मिला पर प्रधान जी की कृपा नहीं बरसी तो परिवार छप्पर में जीवन गुजार रहा है। चकटोडर गांव के जवाहर वनवासी, पिंटू लाल, सेवालाल समेत करीब आठ लोगों के प्रधानमंत्री आवास महीनों से प्लास्टर और ढलाई का इंतजार कर रहे हैं। परियोजना निदेशक मनोज कुमार राय ने कहा कि गांवों में प्रधानमंत्री आवास के निर्माण की जांच की जाएगी। जिन गांवों में तीनों किस्त की रकम निकाली जा चुकी है और आवास नहीं बने हैं, वहां के प्रधान और सेक्रेटरी पर कार्रवाई होगी।