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नौ दिन चले अढ़ाई कोस: अवधि पूरा, मिशन अधूरा

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ज्ञानपुर। नौ दिन चले अढ़ाई कोस। जिलाधिकारी की लाख कवायद के बाद भी दिसंबर तक जिले को ओडीएफ बनाने का मिशन अधूरा ही रह गया। सरकार की महत्वाकांक्षी योजना बैनर और कागजों तक ही रह गया। करीब एक साल से अधिक समय गुजरने के बाद 40 फीसदी गांव भी ओडीएफ नहीं हो सके। प्रशासन का दावा है कि 1091 राजस्व गावों में 400 गांव खुले में शौच से मुक्त हो सके हालांकि दावे से इतर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। इसके पीछे जरूरी सामग्री न मिलने के साथ ही बजट का अभाव भी बताया जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी स्वच्छता अभियान के तहत गावों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए स्वच्छ भारत मिशन के तहत गावों को खुले में शौच से मुक्त बनाना है। करीब डेढ़ साल से जिले के 561 गावों को ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त) बनाने के लिए प्रशासन ने मुहिम शुरू की। जिलाधिकारी से लेकर अन्य अफसरों की ओर से युद्ध स्तर पर इसके लिए काम भी किया गया लेकिन गावों में ढाक की पात वाली कहावत चरितार्थ हुई। 1091 राजस्व गावों में करीब एक लाख 50 हजार शौचालय निर्माण का लक्ष्य निर्धारित किया गया। जिला पंचायत राज विभाग की ओर से 62 हजार शौचालयों का निर्माण शुरू किया गया। गंगा से सटे 46 गावों में प्राथमिकता के आधार पर शौचालय बनवाए गए। प्रशासन की ओर से दिसंबर तक जिले के सभी गावों को ओडीएफ करना था लेकिन चंद दिन शेष बचे हैं और लक्ष्य हजारों मिल दूर है। विभागीय आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो 1091 राजस्व गावों में कौलापुर, प्रयागदासपुर, जयरामपुर समेत 400 गांव को जिला प्रशासन की ओर से ओडीएफ घोषित किया गया है। स्वच्छता मिशन के जिला समन्वयक सरोज पांडेय ने कहा कि डेढ़ लाख शौचालयों के लिए करीब 180 करोड़ की दरकार थी लेकिन कम पैसा आने से शौचालय पूर्ण नहीं हो सका। ग्राम प्रधान संग पंचायत स्तर के कर्मचारियों का सहयोग बेहतर नहीं मिल सका। बजट मिलने पर काम पूर्ण कराया जाएगा।
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