छुट्टा छोड़े गए पशुओं के चलते जिले के ग्रामीण क्षेत्र के किसानों की फसलों को नुकसान हो रहा है। आवारा और छुट्टा पशु किसानों की खड़ी फसल चट कर जा रहे हैं। ऐसे में किसानों की भरी पूरी मेहनत आसानी से नष्ट करने में कसर नहीं छोड़ रहे हैं। जिले के करीब अधिकांश गांव में यह समस्या वर्तमान में आम हो चुकी है। इसको लेकर जिले के किसानों की प्रशासन के प्रति नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि प्रशासनिक बेरूखी से किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मालूम हो कि दूध न देने वाली गायें और बड़े हो चुके बछड़ों को पशुपालक बेलगाम छोड़ देते हैं।क्योंकि अन्य पशुओ ंइस तरह अनुपयोगी होने पर कहीं अन्य उपयोग हो जाता है।चूंकि गाय और बछड़ों का उपयोग न होने पर लोग उन्हें अपने क्षेत्र से दूर छोड़ देते हैं। इसी तरह पशु पालन करने वाले पालक एक दूसरे के क्षेत्र में छोड़ देते हैं। ऐसे में इन प शुओं की तादाद बढ़कर हर क्षेत्र में 50 से सौ की तादाद में पहुंच गई है। एक समूह में जिधर निकलते हैं तो उधर दस बिस्वा से एक बीघा तक फसल चरकर नष्ट कर देते हैं।
ऐसे में शाम को लहलहाती फसल देखने वाले किसान सुबह फसल चौपट होने पर खून के आंसू रोकर रह जाते हैं। ऐसे में वे शासन-प्रशासन को कोसते रहते हैं। जिले के किसान नेता अशोक यादव,सालिक राम ने कहा कि किसान हितैषी होने का दंभ भरने वाली भाजपा सरकार में जिले के किसान उतने ही परेशान है। गौरक्षकों के आतंक ने कि सानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। शासन से लेकर प्र शासन तक शांत है।