ज्ञानपुर। इस बार लोकसभा चुनाव में जर्जर सड़कें जनता का बड़ा मुद्दा बनने जा रही हैं। पांच साल तक सड़कों की हालत को अनदेखा करने वाले जनप्रतिनिधियों को उसी रास्ते जनता के दर पर पहुंचकर वोट मांगने से पहले जवाब देना होगा। कुछ इलाके के लोगों ने तो सड़कों की बदहाली पर मतदान का बहिष्कार करने तक का मन बना लिया है।
कुछ प्रमुख मार्गों को छोड़ दिया जाए तो जिले की अधिकांश सड़कें लंबे समय से बदहाली के दौर से गुजर रहीं हैं। इनके निर्माण के लिए ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों से लेकर सरकारी दफ्तरों तक गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। अब चुनाव आया है तो नेताओं की जमात उन्हीं बदहाल सड़कों से होकर फिर ग्रामीणों के दर पर पहुंचने लगी है, लेकिन वोटर इस बार अडिग हैं। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासनों की घुट्टी से दाल नहीं गलने वाली। पांच साल तक बहुत झेला लिया। प्रत्याशियों की परख सड़कों की कसौटी पर होगी। संपर्क मार्गों की हालत सबसे खराब है। कुछ सड़कों का शिलान्यास तो कर दिया गया, लेकिन चुनाव अधिसूचना जारी होने से कुछ दिन पहले ही शिलान्यास होने के कारण उन पर काम शुरू न हो सका। सीतामढ़ी में वाल्मीकि आश्रम से हनुमान मंदिर सड़क दो साल से खराब हालत में है। इससे होकर प्रतिदिन बड़ी संख्या में सैलानी और दर्शनार्थी गुजरते हैं। ज्ञानपुर में चकटोडर से पटेलनगर लिंक मार्ग की हालत भी डेढ़ साल से खस्ता है। इस सड़क से ग्रामीण इलाके नगर क्षेत्र से जुड़ते हैं। ऐसी ही हालत मोढ़-करियांव मार्ग, चौरी-अनेगपुर मार्ग समेत दो दर्जन से अधिक सड़कों की है। सड़कों की मरम्मत की मांग करते-करते थक चुके ग्रामीण अब चुनाव में टाइट हो गए हैं। उनका कहना है कि अब देखना है कि सड़कों की हालत सुधारने की मांग को अनसुना कर चुके नेता जी किस मुंह से दोबारा वोट मांगने आते हैं। लखनो गांव निवासी अशोक दुबे कहते हैं कि सड़क सुधार की दिशा में जनप्रतिनिधियों ने संजीदगी से ध्यान नहीं दिया। गोपीगंज इलाके के धर्मेंद्र द्विवेदी ने कहा कि जन विकास से जुड़े पहलू पर ध्यान देने की बजाए वोट बैंक की राजनीति करने वालों को अपनी फितरत से बाज आना चाहिए। चुनाव में जनता अपने मताधिकार के प्रयोग से सबक सिखाएगी।