लालानगर। भाजपा सरकार का बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा गोपीगंज नगर में हवा-हवाई साबित हो रहा है। नगर के वार्ड संख्या 16 में गंभीर बीमारी से पीड़ित 10 साल की बच्ची प्रियंका इसकी बानगी है। जन्म से ही प्रियंका के शरीर में शौच का रास्ता नहीं था, जिसे बीएचयू के चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर बना तो दिया, लेकिन बाद में पता चला कि उसके पेट में बड़ी आंत ही नहीं है, इसके इलाज में बड़ा खर्च आएगा। साथ ही बीमारी के कारण कोई स्कूल उसे एडमिशन नहीं दे रहा। अब गरीब मां-बाप बेटी को बचाने और पढ़ाने के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
जनरेटर मिस्त्री का काम करने वाले प्रियंका के पिता के पास इलाज के लिए पैसे नहीं हैं। बीमार बच्ची को हर 10 मिनट में बिना महसूस हुए शौच होने की वजह से कोई स्कूल उसे एडमिशन नहीं दे रहा। इससे बच्ची पढ़ाई नहीं कर पा रही है। पिता हरिशचंद्र विश्वकर्मा ने बताया कि वर्ष 2008 में प्रियंका का जन्म हुआ था। जन्म से ही गंभीर बीमारी की जद में आ गई। गरीबी का दंश झेल रहे असहाय पिता ने बीएचयू ले जाकर उपचार शुरू कराया। चिकित्सकों ने ऑपरेशन कर शौच का रास्ता तो बना दिया, लेकिन बेहतर इलाज के लिए अच्छे हॉस्पिटल में ले जाने की सलाह भी दी। बाद में पता चला कि उसकी बड़ी आंत भी नहीं है, जिसका उपचार काफी महंगा होता है। तीन बार ऑपरेशन होने के बाद प्रतिदिन के इलाज में 300 रुपये की दवा लगती है, जो उनके वश में नहीं है।
बताया कि कुछ दिन पहले वाराणसी के डीएलडब्ल्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सभा में भी पुत्री प्रियंका को लेकर गया था, लेकिन वहां प्रधानमंत्री से मिलने नहीं दिया गया। मदद की गुहार पीएमओ ऑफिस और जनपद स्थित सीएमओ कार्यालय तक लगा चुका हूं। जहां से कोई मदद नहीं मिली। कोई भी विद्यालय बेटी को दाखिला देने के लिए तैयार नहीं हैं। इस संबंध में गोपीगंज सीएचसी अधीक्षक डॉ. आशुतोष पांडेय ने कहा कि मामला मेरे संज्ञान में नहीं है, इसे दिखवाया जाएगा। हालांकि ऐसे मामलों में जनप्रतिनिधि चाहें तो बच्ची को मदद मिल सकती है।