ज्ञानपुर। शिवरामपुर गांव निवासी रानी (5) अपनी दादी की बेहद प्यारी थी। वह जब तब दादी की गोद में बैठकर उन्हें कभी प्यार करती थी तो कभी अपनी नटखट अदाओं से परेशान भी करती थीं। शुक्रवार को रानी की मौत की खबर पाने के बाद से दादी का रो-रोकर बुरा हाल है। वह अपनी रानी को याद कर उसकी प्यार-दुलार को अपने विलाप में पुकार रही है। वह भगवान से भी खासी नाराज हैं। कहती हैं ये भगवान मुझे उठा लिया होता, मेरी प्यारी रानी को क्या उठा दिया। दादी के विलाप के स्वर से हर आंखें गमजदा हैं।
दो दिनों में तीन मासूमों की मौत से शिवरामपुर और भगवास गांव में सन्नाटा पसरा है। अगर कुछ सुनाई दे रहा है तो वह विलाप का करुण क्रंदन है। बच्चों की मौत के गम में दूसरे दिन भी दोनों गांव शोक में डूबा है। हर किसी की आंखें नम हैं। लखनो गांव में 12 जनवरी को हुए स्कूली वैन हादसे में झुलसे 19 बच्चों में से अब तक तीन बच्चे जिंदगी की जंग हार चुके हैं। शिवरामपुर गांव निवासी रानी (5) पुत्री राजन मिश्रा की मौत का गम उसकी दादी इंद्रावती नहीं भूूला पा रही हैं। वह पौत्री को याद कर बिलख पड़ रही हैं। रानी का एक भाई गोविंद मिश्रा (11) अब भी आईसीयू में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहा है। दादी इंद्रावती किसी बच्चे को देखती हैं तो रानी की मौत के जिम्मेदार स्कूल को ही फूंकने की जिद पर अड़ जाती हैं, हालांकि थोड़ी ही देर में वह बेसूूध होकर अचेत हो जाती हैं। उनका यह दर्द देखकर घर पहुंचने वाले हर किसी की आंखें भर आती हैं। मृत बच्चों के घर हादसे के बाद से इस कदर की मायूसी है कि शुक्रवार और शनिवार को चूल्हे नहीं जले। दुनियां देखने से पहले ही दुनिया को अलविदा कहने वाले बच्चों की मौत के जिम्मेदार विद्यालय संचालक समेत जिम्मेदार विभागों पर कार्रवाई की मांग भी अभिभावक कर रहे हैं।