चौरी। साधन सहकारी समिति दरुनहां पिछले तकरीबन 10 वर्षों से बंद चल रही है। अनियमितता को लेकर बंद की गई इस समिति पर ताला लगाने के साथ ही क्षेत्र के किसानों की सुविधाओं का भी गला घोंट दिया गया। मौजूदा समय में किसान खुले बाजार से ऊंची कीमतों पर खाद-बीज लेने के लिए मजबूर हैं। उनकी इस समस्या के मद्देनजर समिति को न तो दोबारा संचालित करने के बारे में सोचा गया ना ही इसका कोई दूसरा विकल्प तैयार किया गया।
अनियमितता के आरोप में बंद चल रही साधन सहकारी समिति दरुनहां से आधा दर्जन गांवों के सैकड़ों किसान जुड़े थे। लगभग 10 वर्ष पहले साधन सहकारी समिति में कर्मचारियों की आपसी गबन का मामला आया था। बताया जाता है कि मामला बड़े स्तर में होने कारण शासन के निर्देश पर समिति पर ताला लगा दिया गया। समिति पर ताला क्या लगा, मानो किसानों की किस्मत पर ही ताला लग गया। तब से आज तक किसान खाद और बीज के लिए दर-दर भटक रहे हैं। लेकिन, किसानों की पीड़ा समझने के लिए विभागीय कर्मचारियों के पास समय नहीं है। समिति बंद होने से दरुनहां, चांदी गहना, लठियां, कंदुई, संवरपुर आदि गांवों के किसानों के सामने खाद-बीज की बड़ी समस्या खड़ी हो गई। किसानों ने खाद बीज के लिए अन्य कई समितियों के चक्कर लगाए, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। लठिया के किसान सच्चिदानंद तिवारी, संवरपुर के सुरेंद्र मिश्रा, दरुनहां के अखिलेश सिंह और चांदी गहना के किसान सुशील तिवारी ने बताया कि समिति पर गबन को लेकर ताला तो लगा दिया गया, लेकिन किसानों की जरूरतें कैसे पूरी होंगी, इस पर ध्यान नहीं दिया गया। कहा कि बाजार से ही महंगे दामों में खाद और बीज खरीदना पड़ता है। महंगे खाद बीज से खेती में क्षति उठानी पड़ रही है, लेकिन जिले के आला अफसर भी इस तरफ ध्यान नहीं देते।