ज्ञानपुर (भदोही)। कोचिंग के रजिस्ट्रेशन पर स्कूल का संचालन। यह सुनने में अटपटा जरूर लगेगा हालांकि है सोलह आने सच। एक दो नहीं, करीब दर्जन भर ऐसे कोचिंग संचालक हैं, जो मान्यता के बजाए कोचिंग का पंजीयन कराकर स्कूल को चला रहे हैं। अभोली, चौरी, औराई और सुरियावां में ऐसे कई संस्थान हैं। यही नहीं, विभागीय कृपा से जिले में अवैध कोचिंग संस्थान का कारोबार तेजी से फलफूल रहा है। बिना पंजीयन कराए गली-मोहल्ले में कोचिंग खोल दी जा रही है।
शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए सरकार की ओर से भले ही स्कूलों में तमाम सुविधाएं दी जा रही है लेकिन शिक्षकों की लापरवाही से ज्यादातर छात्र-छात्राओं का रुझान कोचिंग की तरफ हो जा रहा है। स्कूलों में पढ़ाई बेहतर न होने से आठवीं, हाईस्कूल, इंटरमीडिएट और स्नातक की कक्षाओं में पढ़ने वाले छात्र-छात्राएं कोचिंग के सहारे परीक्षा की वैतरणी पार करने में लग जाते हैं। मोटी कमाई का साधन होने से शिक्षक के अलावा अन्य लोग भी कोचिंग खोलकर स्कूलों का बंटाधार कर रहे हैं। विभागीय आंकड़ों पर गौर किया जाए तो जिले में मात्र 25 कोचिंग संस्थान ही पंजीकृत हैं। इसके इतर 100 से अधिक अवैध कोचिंग संचालित हैं। ज्ञानपुर जिला मुख्यालय को छोड़ दिया जाए तो सुरियावां, गोपीगंज, औराई, बाबूसराय, भदोही समेत अन्य क्षेत्रों में बिना पंजीकृत कोचिंग चल रहे हैं। मजे की बात यह है कि अफसरों की नाक के नीचे कोचिंग का रजिस्ट्रेशन कराकर लोग स्कूल चला रहे हैं। अभोली बाजार, चौरी बाजार, बाबूसराय, औराई में तकरीबन पांच से छह ऐसे सेंटर हैं, जिनका पंजीयन तो कोचिंग का है लेकिन वह स्कूल चला रहे हैं। छठी से लेकर इंटरमीडिएट तक अच्छे नंबर से पास कराने का ठेका भी लिया जा रहा है।
जुलाई और अगस्त में व्यापक स्तर पर निरीक्षण किया जाएगा। अवैध ढंग से चलने वाले स्कूलों और कोचिंग संस्थानों को बंद कराया जाएगा। उनका संचालन करने वालों पर मुकदमा भी दर्ज कराया जाएगा। - श्याम बिहारी वर्मा, जिला विद्यालय निरीक्षक