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कुंभ:नहीं चल सका जलपोत,स्नानार्थि यों में छाई निराशा

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सीतामढ़ी। प्रयागराज में शुरू हो चुके कुंभ में जलपोत से लोगों का पहुंच पाना अब शायद सपना ही रह जाएगा। रेल और सड़क मार्ग की अपेक्षा कुंभ स्नान के लिए जलमार्ग से जाने की इच्छा पर मानो ग्रहण सा लग गया हो। सीतामढ़ी घाट पर बना ठहराव स्टेशन यानी जैटी को देख लोग शासन-प्रशासन को कोसते नजर आ रहे हैं। जबकि जलमार्ग से प्रयागराज तक की यात्रा को लेकर लोगों में खासा उत्साह दिख रहा था। क्योंकि वाराणसी से प्रयागराज तक जलमार्ग से होते हुए जहाज को चलाने के लिए प्रदेश सरकार की हरी झंडी अभी तक नहीं मिल सकी है। हालांकि यह कह पाना भी मुश्किल होगा कि जहाज चलेगी भी या नहीं ? यह भी माना जा रहा है कि गंगा में पानी के जहाज से सुगम यात्रा में सबसे बड़ी बाधा पीपा पुल बने हैं। सूत्रों का कहना है कि यदि नियमित जहाज चलेंगे तो पीपा पुलों को लगभग दो माह तक यातायात के लिए बंद करना ही पड़ेगा। इसके कारण लोगों को भारी असुविधाओं का सामना करना समय की मांग होंगी। उधर प्रयागराज से सिरसा तक जहाज का आवागमन शुरू कर दिया गया है। इनलैंड वाटर वेज अथारिटी ने जहाजों के सकुशल संचालन के लिए वाराणसी से प्रयागराज तक जलमार्ग की तैयारी के साथ रुकने के लिए रामनगर, चुनार, विंध्याचल, सीतामढ़ी, सिरसा, छतनाग आदि गंगा तटों पर जैटी का निर्माण भी कराया जा चुका है। अमर उजाला ने ऽजहाज से जा सकेंगे प्रयागराज कुंभऽ नामक शीर्षक से खबर का प्रकाशन प्रमुखता से किया था। इसके बाद पानी के जहाज से कुंभ यात्रा के लिए लोगों की उत्सुकता बढ़ गई। बड़ी संख्या में लोग जहाज से यात्रा के लिए मकर संक्रांति को सीतामढ़ी पहुंचे, लेकिन जहाज न चलने से लोगो को निराशा हाथ लगी। ज्ञात हो कि कुंभ स्नान व दर्शन के लिए वाराणसी से प्रयागराज तक 200 यात्रियों की क्षमता वाले पानी के तीन बड़े जहाज चलाने की योजना है। धार्मिक स्थल सीतामढ़ी में जहाज रुकने के लिए जेटी का निर्माण किया गया है। आई डब्लूआई के टेक्निकल असिस्टेंट पंकज गुप्ता ने फोन पर बताया कि जलमार्ग, चैनल का निर्माण पूर्ण है। सिरसा से प्रयागराज तक जहाज का संचालन नियमित हो रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से हरी झंडी मिलते ही आवागमन शुरू करा दिया जाएगा।
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