ज्ञानपुर (भदोही)।
प्रांतीय नेतृत्व के आह्वान पर सोमवार को ईंट निर्माता समिति के बैनर तले भट्ठा संचालकों ने कलेक्ट्रेट पर धरना दिया। जीएसटी कर प्रणाली में समाधान योजना लागू करने और पर्यावरणीय स्वच्छता प्रमाणपत्र लेने की बाध्यता समाप्त करने की मांग की गई। अंत में मुख्यमंत्री को संबोधित पांच सूत्री ज्ञापन एडीएम को सौंपा।
संगठन के जिलाध्यक्ष मिठाईलाल दूबे ने कहा कि ईंट-भट्ठों पर व्यापार कर समाधान योजना 1988 से 2016 तक सफलतापूर्वक प्रभावी रही। 2008 में मूल्य संवर्द्धित कर (वैट) प्रणाली लागू होने के बाद सरकार का राजस्व आधा हो गया था लेकिन बाद में संशोधन किया गया। जीएसटी के तहत 75 लाख के टर्नओवर पर स्वत: समाधान योजना प्रभावी रहने का प्रावधान किया गया है। भट्ठा संचालकों का टर्नओवर सीमा दो करोड़ तक बढ़ाया जाए। जीएसटी में सरकार समाधान को समाहित नहीं करेगी तो भट्ठा संचालक बर्बाद हो जाएंगे। साथ ही सरकार के राजस्व की क्षति होगी। राहुल दूबे ने सीमेंट से बनने वाले ईंट को भ्रष्टाचार का पोषक बताया। कहा कि पूर्व के सरकारों में उच्च पदों पर आसीन नेताओं ने ज्यादातर सीमेंट ईंट की कंपनी खोली। लाल ईंट पांच तो वह ईंट 31 रुपये में मिलती है। फलाई ऐश ब्रिक्स से हानिकारक किरणों के चलते तमाम बीमारी भी फैलती है। धरने में प्रेमराज सिंह, मेवालाल यादव, तहसीलदार सिंह, हृदय सिंह, गया सिंह, पिंटू सिंह समेत कई लोग मौजूद रहे।