भदोही। उच्च न्यायालय ने नगरपालिका परिषद भदोही में चल रहे टेंडरों की कार्रवाई में वर्कआडर्र जारी करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने सुनवाई के लिए दो पक्षों को नोटिस भेजने के साथ-साथ 16 अगस्त की तारीख नियत की है। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश दिलीप बी भोसले और मनोज कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने 31 जुलाई को सभासद शफीक अहमद व अन्य की याचिका में दी है। याचिकाकर्ता सभासदों में बुधवार को होटल शिराज में प्रेसवार्ता कर कोर्ट के निर्णय से अवगत कराते हुए फैसले की प्रति भी उपलब्ध कराई।
सभासद शफीक अहमद समेत 13 सभासद प्रेसवार्ता में मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि पालिकाध्यक्ष के तानाशाही और भेदभावपूर्ण रवैये से पालिका क्षेत्र का विकास थम गया है। बैठकों में सभासदों की नहीं सुनी जाती और मनमानी की जाती है। इसी को देखते हुए गत 15 अप्रैल को बोर्ड की बैठक में हम लोगों ने बहुमत से पालिकाध्यक्ष के वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार वापस ले लिए थे। बावजूद चेयरमैन लगातार टेंडर करने के अलावा भुगतान भी कर रही थीं। बार-बार रोकने के बाद भी न तो हम लोगों को सूचनाएं दी जा रही थीं, न ही बोर्ड के आदेशों का पालन ही हो रहा था। सभासद गुलाम हुसैन संजरी ने कहा कि पालिका द्वारा नगर में लगवाए गए दर्जनों सबमर्सिबल पंप भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं। लाखों करोड़ों खर्च के बाद भी लोगों को पेयजल उपलब्ध नहीं है। सभासद प्रदीप विश्वकर्मा ने कहा कि पालिका के कार्यकाल में द्वेष भावना से कार्य हुआ है। दर्जनों टेंडरों पर कार्रवाई नहीं की गई जबकि मनमाफिक वार्डों में निर्माण कार्यों में अनियमितता की गई। तानाशाही का यह आलम है कि विरोधी सभासदों पर गंभीर मुकदमे दर्ज कराए गए। याचिका पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने कहा कि टेंडर किए जा सकते हैं लेकिन जब तक कोई फैसला नहीं हो जाता, वर्कआडर न जारी किया जाए। वार्ता में अमजद सोमारू, हफीजुल्लाह शाह, साहबे आलम, रविंद्र मौर्य, शिवशंकर सरोज के अलावा एडवोकेट महेंद्र बिंद, गुलाम साबिर, बबलू अंसारी, शशिकांत, लालजी .यादव आदि रहे।