ज्ञानपुर। जिले में रबी सीजन की फसल कटाई और थ्रेसिंग का काम पूरा होते ही श्रमिकों के सामने एक बार फिर रोजगार की समस्या खड़ी हो गई है। ऐसे में मनरेगा भी धोखा देती नजर आ रही है। करीब 84 गांवों में मनरेगा के तहत होने वाले काम बंद पड़े हैं, हालांकि विभाग का दावा है कि निर्देश के बाद काम शुरू हो चुके हैं।
मजदूरों के पलायन को रोकने के लिए कांग्रेस सरकार की मनरेगा वर्ष 2008 से जिले में प्रभावी हुई। शुरूआती दौर में तालाबों के सुंदरीकरण से लेकर अन्य कामों में तेजी से काम हुआ लेकिन समय गुजरने के साथ ही योजना भी अपने ट्रैक से भटक गई, स्थिति यह हो गई है कि जिले में मजदूरों को 100 दिन काम नसीब नहीं हो पा रहा है। अधिकांश श्रमिक बीते माह तक कृषि कार्यों में व्यस्त रहे। अब, जब फसल कटाई, थ्रेसिंग जैसे कार्य पूरे हो गए हैं तो श्रमिकों के लिए घर पर बैठने की स्थिति बन गई है। कई गांवों में रोजगार की मांग बढ़ गई है। इसके बाद भी जिले के 84 गांवों में मनरेगा के तहत रोजगार का सृजन अब तक नहीं किया गया है, ऐसे में गांवों में काम पूरी तरह ठप है। मनरेगा के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रधानमंत्री आवास निर्माण, नाले को गहरा करना और गड्ढे खोदने का काम चल रहा है। जिले के 561 ग्रामसभाओं में पंजीकृत एक लाख 19 हजार जाबकार्ड धारकों में 49 हजार 726 सक्रिय हैं। वित्तीय वर्ष 2018-19 में सक्रिय मजदूरों में किसी को 10 दिन, किसी को 40 दिन और किसी को 50 दिन ही काम मिल सका। 100 दिन काम पाने वाले में मात्र तीन हजार मनरेगा मजदूर शामिल रहे। श्रमायुक्त मनरेगा सुनील तिवारी ने कहा कि वित्तीय वर्ष में 15 लाख दो हजार मानव दिवस सृजित करने का लक्ष्य दिया गया है। सभी ग्राम पंचायतों से काम का प्रस्ताव बना कर देने के लिए कहा गया है। जिले के 84 गांवों में मनरेगा का काम ठप था, हालांकि चेतावनी के बाद काम शुरू हो चुका है।