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नकलची कभी विद्वान नहीं बन सकता

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ऊंज। आर्य समाज जंगीगंज के 54वें वार्षिकोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को महात्मा सत्यमुनि ने बताया कि नकलची कभी विद्वान नहीं बन सकता। विद्वान बनने के लिए अध्यात्म की जरूरत होती है। यह तभी संभव है, जब गुरु के बताए रास्ते को आत्मसात किया जाए। ृ भजन संध्या में उपस्थित भक्तों से कहा कि मनुष्य पाश्चात्य संस्कृति की नकल कर अपने आप को धोखा दे रहा है। कभी अध्यात्म के क्षेत्र में विश्व गुरु रहने वाले देश को पुन: वेद की ओर लौटना होगा। कहा कि शेक्सपियर और चर्चिल के विचारों को त्याग कर स्वामी विवेकानंद, दयानंद प्रभु श्रीराम और श्रीकृष्ण के मार्ग पर चलकर ही जगत गुरु बना जा सकता है। कोलकाता से आए डॉ. कैलाश कर्मठ ने कहा कि पाश्चात्य भोजन बर्गर और पिज्जा को छोड़ कर दूध, घी, फल-फूल एवं ताजे भोजन से ही हमारा शरीर एवं मस्तिष्क स्वस्थ रह सकता है। मिर्जापुर से आए रामअधार शास्त्री ने यज्ञ एवं हवन के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं आर्य समाज के प्रखर विद्वान स्वामी केवलानंद ने मानव के संस्कार एवं सद्गुण पर प्रकाश डालते हुए मानव एवं पशु में अंतर समझाकर स्वामी दयानंद सरस्वती के मार्ग पर चलने का आह्वान किया। इस मौके पर कन्हैयालाल, रामफेरन शास्त्री, पारसनाथ मिश्र, प्रेमलाल आर्य, रामराज, यज्ञनारायण आर्य, श्यामधर आर्य, बालगोविंद शास्त्री आदि उपस्थित रहे।
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