ज्ञानपुर। विमला त्रिपाठी और उनके पति एडवोकेट श्यामधर त्रिपाठी के घर में शुक्रवार को भावनाओं के कई रंग देखने को मिले। कलेजे के टुकड़े की सलामती की चिंता माथे पर लकीरों के रूप में उभरी रही तो कायरता की हद पार करने वाली आतंकियों की करतूत की कड़ी से कड़ी सजा देने टीस अंदर तक सालती रही। साथ ही देश सेवा में जुटे बहादुर बेटे के पेशेगत जज्बे पर फख्र के भाव भी रह-रह कर आंखों में चमक उठते थे। यह सब कुछ कश्मीर के पुलवामा में आतंकियों की हरकत के चलते हो रहा था। त्रिपाठी दंपती के बड़े बेटे मनोज त्रिपाठी सीआरपीएफ में सहायक कमांडेंट टूआईसी (सेकंड इंचार्ज) हैं, जो इस समय श्रीनगर की 203वीं बटालियन में तैनात हैं। बृहस्पतिवार को पुलवामा में आतंकी हमले में 42 जवानों के शहीद होने की खबर ने यहां ज्ञानपुर नगर के नारायण कॉलोनी में रहने वाले मां-बाप की धड़कनें बढ़ा दी। घबराए त्रिपाठी दंपती ने तुरंत फोन कर उसकी सलामती की जानकारी ली। साथ ही देश सेवा के साथ अपना ख्याल भी रखने की हिदायत दी। शुक्रवार को पूरे दिन टीवी पर आतंकी हमले से जुड़ी अपडेट देखने के बाद अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि घटना ने झकझोर कर रख दिया। कितनी माताओं के लाल शहीद हो गए और अनेक मांगें सूनी हो गईं। इससे आतंकियों को क्या मिला। अब सरकार को चाहिए कि वह इस हरकत का उसी भाषा में जवाब दे। त्रिपाठी ने कहा कि मुझे गर्व है कि मेरा बेटा इतनी प्रतिष्ठित फोर्स में जाकर देश सेवा कर रहा है। पाकिस्तान और आतंकवादी चाहे कितना भी खून बहा लें, लेकिन भारत मां के सपूतों का जज्बा कम नहीं होगा, अलबत्ता बढ़ता ही जाएगा।