भदोही। केंद्रीय वस्त्र मंत्रालय ने फरवरी 2017 में हुए कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के प्रथम और द्वितीय उपाध्यक्ष सहित एक तिहाई प्रशासनिक सदस्यों के चुनाव पर सवाल खड़ा करते हुए इसे नए सिरे से पुन: कराने का निर्देश दिया है। मंत्रालय ने गत वर्ष 19 सितंबर को परिषद के अधिशासी निदेशक, संजय कुमार को पत्रावली जारी कर चुनाव में नियमों की अनदेखी करने का संज्ञान लेते हुए इस पर कड़ा रुख अख्तियार कर 21 जनवरी को रिमाइंडर भेजा है।
फरवरी 2017 में परिषद के प्रथम उपाध्यक्ष पद पर सिद्धनाथ सिंह, द्वितीय उपाध्यक्ष पद पर उमर हमीद के अलावा प्रशासनिक सदस्यों के पांच रिक्त पदों पर अब्दुल रब, राजेंद्र मिश्रा, हुसैन जाफर, सतीश वाटल और बोधराज मल्होत्रा का निर्वाचन निर्विरोध हुआ था। निर्वाचन के बाद परिषद के पूर्व चेयरमैन ओपी गर्ग ने चुनाव में नियमों और निर्देशों की अनदेखी के आरोप लगाते हुए उच्चाधिकारियों को पत्रक भेजे थे। चुनाव के लगभग डेढ़ साल बाद 21 सितंबर को अंडर सेक्रेट्री भारत सरकार आरके सिंह ने परिषद को पत्र जारी कर चुनाव नए सिरे से कराने का निर्देश दिया। यह भी कहा गया है कि अन्यथा की स्थिति में परिषद को एमएआई योजना के तहत मिलने वाली ग्रांट पर रोक लगा दी जाएगी।
पूरे मामले को केंद्र सरकार के संज्ञान में लाने वाले पूर्व चेयरमैन ओपी गर्ग ने बताया कि सात दिसंबर 2015 को वाणिज्य मंत्रालय ने सभी निर्यात संवर्धन परिषदों को निर्देशित किया था कि अपने अपने बाइलाज में संशोधन करें कि उपाध्यक्ष का निर्वाचन प्रशासनिक समिति के सदस्यों में से होगा, लेकिन परिषद ने ना तो संशोधन किया, ना ही उस पर अमल हो सका। इसके बाद मंत्रालय ने संज्ञान लिया। मंत्रालय के इस दिशा निर्देश पर कालीन उद्योग जगत में खलबली मच गई है और चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
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इस संबंध में 19 सितंबर के वस्त्र मंत्रालय के पत्र का जवाब संबंधित अधिकारी को दिया जा चुका है। यदि मंत्रालय कोई और दिशा निर्देश जारी करता है तो उसका पालन किया जाएगा। गत 28 जनवरी को नई दिल्ली में हुए असाधारण आम सभा की बैठक में परिषद के बाईलाज में सरकार द्वारा वांछित बदलाव कर दिए गए हैं। संजय कुमार, अधिशासी निदेशक, सीईपीसी।