ज्ञानपुर। प्रधानमंत्री से लेकर सूबे के मुख्यमंत्री तक स्वच्छता मिशन को लेकर संजीदा हैं, लेकिन जिले में स्वच्छता अभियान बेपटरी हो चुका है। जिले में करीब पांच सौ सफाई कर्मचारियों पर प्रति माह एक करोड़ खर्च होने के बाद भी जगह-जगह कूड़े का अंबार लगे दिखते हैं। ज्ञानपुर, गोपीगंज, घोसिया समेत पांच नगर पंचायत और दो नगर पालिका क्षेत्र की कमोबेश एक जैसी ही स्थिति है। स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए सरकारों की ओर से तमाम प्रयास किया जा रहा है लेकिन आम लोगों की धारणा के संग अफसर भी संजीदा नहीं दिख रहे हैं। जिले के नगरीय इलाकों में स्वच्छता अभियान अपना रास्ता भटक चुका है। साफ-सफाई के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है। जिससे सार्वजनिक स्थलों के आसपास कूड़े का अंबार लगा हुआ है। साफ-सफाई न होने से बीमारी फैलने का खतरा भी बढ़ जाता है। घोसिया नगर पंचायत में 35 प्राइवेट, पांच संविदा और पांच सरकारी कर्मचारियों संग अन्य जरूरतों पर हर माह करीब पांच लाख खर्च होता है, जबकि सालाना साठ लाख सफाई पर खर्च किया जाता है। इसी तरह ज्ञानपुर, नई बाजार, सुरियावां, खमरिया नगर पंचायत व भदोही और गोपीगंज नगर पालिका में करीब 80 से 90 लाख महीने में खर्च होता है। लाखों रुपये खर्च किए जाने के बाद भी स्वच्छता अभियान की हवा निकल गई है। गोपीगंज, ज्ञानपुर समेत अन्य नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के मोहल्लों में जगह-जगह कूड़ों का ढेर लगा है तो सार्वजनिक स्थल भी गंदगी से नहीं बच सके हैं।