भदोही। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय में मंगलवार को रोवर्स-रेंजर्स शिविर के दूसरे दिन शिक्षार्थियों को स्काउटिंग प्रार्थना, झंडा गीत, प्रतिज्ञा, स्काउटिंग के इतिहास और नियमों की जानकारी दी गई। इस दौरान प्राथमिक स्वास्थ सुविधाओं के बारे में भी विस्तारपूर्वक बताया गया। रोवर्स - रेंजर्स को आवश्यकता पड़ने पर वैकल्पिक व्यवस्था से स्ट्रेचर भी बनाने की विधि बताई गई। प्रशिक्षक शेषधर दूबे ने स्काउट के इतिहास बताते हुए कहा कि इसकी स्थापना लार्ड रोवर्स स्टीफेंस स्मिथवेडेन पावेल ने की थी। 1976 में सैनिक अधिकारी बन कर वे मेरठ आए थे। 1907 में बाऊसी द्वीप में 20 बालकों का शिविर आयोजित कर इसकी नींव रखी थी। मंगलवार को भी रोवर्स और रेंजर्स को छह टोलियों में बांटा गया था। उन्हें चीता, बाज, बाघ, बुलबुल, कोयल और मोरनी का नाम दिया गया। प्रशिक्षक ने कहा कि विषम परिस्थितियों में कोई दुर्घटना हो जाए और आसपास कोई चिकित्सालय न हो तो संयम से काम लेना चाहिए। सबसे पहले मरीज को प्राथमिक चिकित्सा दें जो आपके पास हर समय उपलब्ध होनी चाहिए। प्राथमिक चिकित्सा के बाद यदि मरीज को कहीं ले जाने की स्थिति आए तो आपको स्ट्रेचर बनाना भी आना चाहिए। शिविर में शिविरार्थियों को स्ट्रेचर बनाना सिखाया गया। छात्रों को बताया गया कि स्ट्रेचर से आप अपने घायल सहयोगी को अस्पताल पहुंचा जा सकते हैं। उन्होंने डायल-100 के बारे में भी बताया। शिविर को प्रशिक्षक चंद्रेश राय ने भी संबोधित किया। संचालन रोवर्स प्रभारी डा.बृजेश सिंह और रेंजर्स प्रभारी डॉ.भावना सिंह ने किया।