स्वच्छ भारत मिशन के फेज-2 में पांच हजार से कम आबादी वाली शेष 185 ग्राम पंचायतें भी अब मॉडल बनेंगी। पंचायत राज विभाग ने 10.12 करोड़ रुपये जारी कर दिया है। मार्च 2025 तक इन ग्राम पंचायतों में कूड़ा प्रबंधन से लेकर आआरसी यानी रिसोर्स रिकवरी सेंटर आदि शुरू कराने का लक्ष्य तय किया गया है। अब तक 200 से अधिक गांवों में कूड़ा उठान से लेकर प्रबंधन शुरू हो चुका है।
स्वच्छता सरकार की प्राथमिकता में है। स्वच्छ भारत मिशन के तहत जिले की 546 ग्राम पंचायतों में पहले दो लाख 35 हजार एकल और बाद में 720 सामुदायिक शौचालयों का निर्माण कराया गया। लेकिन कूड़े का निस्तारण नहीं होने से गंदगी से राहत नहीं मिली। स्वच्छ भारत मिशन के फेज-2 में 2022 में पांच हजार से अधिक आबादी वाले 12 गांवों को मॉडल के रूप में विकसित करने के लिए चयन किया गया। जिसे 2023 में मॉडल कर दिया गया।
कूड़े का घर से उठान होने के साथ ही अन्य गतिविधियां भी शुरू हो चुकी हैं। गंगा से सटे 47 और बाद में पांच हजार से कम आबादी वाली 302 ग्राम पंचायतों का चयन किया गया। अब तक पंचायत राज विभाग ने 200 से अधिक गांवों में रिकवरी रिसोर्स सेंटर को शुरू कर दिया है। अब पंचायत राज विभाग 546 में शेष बची 185 ग्राम पंचायतों को भी मॉडल बनाने की मुहिम में जुट गया है। इन ग्राम पंचायतों में काम शुरू कराने के लिए 10.12 करोड़ जारी किया गया। जहां डोर टू डोर कूड़ा निस्तारण, ठोस कूड़ा प्रबंधन, वर्मी कंपोस्ट पिट निर्माण आदि होगा।
-
इनसेट
यह है रिसोर्स रिकवरी सेंटर
ग्राम पंचायतों के लिए रिसोर्स रिकवरी सेंटर निर्माण की योजना है। यहां पर ठोस और तरल कचरे को अलग किया जाएगा। कचरे को उपयोगी बनाने के लिए कार्य होगा। इससे बायोगैस और जैविक खाद भी तैयार होगी। स्वयं सहायता समूहों को इसकी जिम्मेदारी दी जाएगी।
ये होंगे काम
ग्राम पंचायतों को सुंदर और मॉडल बनाने के लिए स्वच्छता को लेकर विशेष अभियान चलेगा। हर गली-चौराहों पर पथ प्रकाश की व्यवस्था होगी। इतना ही नहीं तालाबों का सुंदरीकरण कराया जाएगा। गांवों में सड़कों की मरम्मत होगी, सीसी रोड निर्माण, जलभराव की समस्या का समाधान कराया जाएगा। कहीं पर भी कूड़े के ढेर नहीं लगने दिए जाएंगे।