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भू-माफिया पर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी

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भू-माफिया पर जीरो टॉलरेंस पॉलिसी
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बस्ती। कमजोर व्यक्ति की जमीन विवादित कर कब्जा करने का खेल अब नहीं होने पाएगा। विवादित जमीन की खरीद-फरोख्त और कब्जा करने वाले जेल भेजे जाएंगे। किसी भी भूमि पर दखलंदाजी का उसी को हक होगा, जिसके पास मालिकाना हक होगा। बिना इसके यदि कोई आपराधिक छवि का व्यक्ति हनक बनाकर जमीन कब्जा करने की कोशिश किया तो उसे भू-माफिया घोषित किया जाएगा। एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि इसमें जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत कार्रवाई की जा रही है।
25 जुलाई-2011 शाम साढ़े छह बजे हिंदू युवा वाहिनी के तत्कालीन प्रदेश संयोजक विष्णुदत्त ओझा की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद शहर में जमकर बवाल हुआ था। इस केस के पीछे कोतवाली क्षेत्र के पांडेय पोखरा के पास की जमीन का विवाद सामने आया था। नौ अक्तूबर को छात्रनेता कबीर तिवारी की हत्या में भी अब तक की गई पुलिस की तफ्तीश में विवादित जमीन पर कब्जे की बात सामने आई है। 19 जून को एपीएन कॉलेज के गेट के पास की एक दुकान पर खड़े युवक पर केशरिया वस्त्रधारी हमलावर ने तमंचे से फायर झोंक दिया था। इसमें भी जमीन का विवाद बताया गया। एसपी हेमराज मीणा का कहना है कि इस तरह के यहां कई हत्या अथवा प्राण घातक हमले की घटना हो चुकी है। जनता दर्शन के दौरान भी सबसे ज्यादा इसी तरह के प्रार्थनापत्र आते हैं। ऐसे में इस धंधे को रोकना पहली प्राथमिकता होगी। इस मुद्दे को जीरो टॉलरेंस पॉलिसी के तहत हैंडिल किया जा रहा है।
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राजनीतिक शक से हुए बेलगाम
शहर से लेकर देहात तक में सरकारी जमीन पर दुस्साहसी प्रवृत्ति के लोग अट्टालिकाएं खड़ी करने के शौकीन होते गए। राजनीतिक संरक्षण में पुलिस व प्रशासन का सहयोग भी उन्हें सहज ही हासिल होता रहा जिससे वे बेलगाम होते गए। जब भी बात कहीं फंसती है तो राजनीतिक आका एंड़ी-चोटी का जोर लगा देते हैं। इस खेल को पुलिस समझ चुकी है।
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भू-माफिया बनाने में भेदभाव
पिछले दिनों शासन की प्राथमिकता में शामिल जमीन पर कब्जे पर भूमाफिया घोषित करने का अभियान चलाया गया। मगर इसमें भेदभाव किया गया। छोटे-मोटे मामलों में कार्रवाई दिखाने के लिए की गई। इसी का परिणाम रहा कि जिले भर में सिर्फ नौ भू-माफिया चिह्नित किए जा सके। प्रशासन इसे भी गंभीरता से लेने के मूड में है।
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