बस्ती। जिले में संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसका असर प्रसव के आंकड़ों में भी दिख रहा है।
एक अप्रैल से 10 सितंबर तक जिले में 11,056 संस्थागत प्रसव कराए जा चुके हैं। इस मामले में जिला महिला अस्पताल ने मेडिकल कॉलेज को पीछे छोड़ दिया है। महिला अस्पताल में अब तक 1,895 प्रसव हुए हैं, जबकि मेडिकल कॉलेज में 1,547 प्रसव कराए गए हैं।
जिले में मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल, 100 बेड महिला अस्पताल हर्रैया के अलावा 14 ब्लॉक स्तरीय सीएचसी, कुछ पीएचसी और स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर प्रसव की सुविधा उपलब्ध है। मेडिकल कॉलेज, जिला महिला अस्पताल और 100 बेड महिला अस्पताल हर्रैया में नियमित रूप से ऑपरेशन से प्रसव कराए जाते हैं।
वहीं, भानपुर, रुधौली और हर्रैया की फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) में ऑपरेशन से प्रसव कभी-कभार ही हो रहे हैं। इन केंद्रों पर सामान्य प्रसव का ग्राफ ठीक है, लेकिन सिजेरियन प्रसव के मामले में स्थिति संतोषजनक नहीं है।
स्वास्थ्य विभाग ने मार्च तक जिले में 32,012 संस्थागत प्रसव कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके सापेक्ष 10 सितंबर तक 11,056 प्रसव हो चुके हैं। इनमें महिला अस्पताल में 1,895, मेडिकल कॉलेज में 1,547, सांऊघाट में 523, कप्तानगंज में 322, बनकटी में 441, हर्रैया में 492, मरवटिया सदर में 341, 100 बेड महिला अस्पताल हर्रैया में 297, बहादुरपुर में 524, रुधौली में 707, रामनगर में 604, परशुरामपुर में 934, गौर में 555, कुदरहा में 517, विक्रमजोत में 454, दुबौलिया में 386 और सल्टौआ में 517 प्रसव हुए हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार 11,056 प्रसव में से 11,055 की फीडिंग पोर्टल पर हो चुकी है। केवल रुधौली का एक मामला लंबित है। वहीं, 10,706 लाभार्थियों का जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के लिए ऑनलाइन आवेदन किया जा चुका है। 349 आवेदन लंबित हैं। अब तक 8,680 लाभार्थियों को जेएसवाई का भुगतान किया जा चुका है, जो करीब 79 प्रतिशत है।