राष्ट्रीय राजमार्ग-28 पर निर्बाध और सुरक्षित यात्रा मुश्किल में है। फोरलेन पर फर्राटा भरते वाहनों के लिए एनएचआई ने जगह-जगह संकेतक लगवा रखे हैं जिनसे लोगों को तमाम कहां क्या है? की जानकारी मिल जाती है, मगर अधिकांश संकेतक फोरलेन के दोनों ओर स्थित पेड़ों की लटकती शाखाओं और झाड़ियों के बीच छिप गए हैं। इसी कारण तमाम दुर्घटनाएं हाईवे पर आएदिन हो रही हैं।
हाईवे पर राहगीरों को कहां मोड़ है, कहां स्कूल है, कहां आबादी है और कहां क्रॉस रोड है आदि की जानकारी संकेतकों से मिलती हैं। वाहन चालक उसी के अनुसार वाहन की गति धीमी या तेज करते-रहते हैं। फोरलेन निर्माण के बाद वाहनों की रफ्तार बढ़ गई है। इसी के चलते सड़क सुरक्षा के इंतजाम किए गए हैं, लेकिन रखरखाव और सफाई न होने के चलते ये सुरक्षित यात्रा में बाधा बने हुए हैं।
सघन आबादी वाले कस्बों और दुर्घटना बहुल स्थलों पर संकेतक लगवाए गए, लेकिन अब वह दिखाई ही नहीं दे रहे हैं, जिससे दुर्घटना का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है। इसके चलते राजमार्ग के किनारे बसी सघन आबादी हर समय खतरे के साए में रहती है। जनपद की सीमा घघौवा से पठखापुर, विक्रमजोत, छावनी, हरैया, कप्तानगंज और बस्ती तक जगह-जगह दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्र घोषित हो चुके हैं। सघन आबादी वाले कस्बों और ओवरब्रिजों के समीप संकेतक हैं जो झाड़ियों व पेड़ों के चलते अपनी उपयोगिता साबित नहीं कर पा रहे हैं।
हाईवे के निकट के ग्रामीण रामस्वारथ सिंह, बलराम सिंह, सुभाष चौबे, रघुनायक शुक्ल, एसडी तिवारी कहते हैं कि हाईवे पर वाहनों की गति नियंत्रित करने का उपाय करने के बजाय सुरक्षित यात्रा के लिए संकेतकों को दुरुस्त कराया जाए। ग्रामीण महेश कुमार, देवधर दूबे, देवेंद्र सिंह, हबीबुल्लाह, रियाज अहमद, अनुपम सिंह आदि का कहना है कि राजमार्ग पर संकेतकों के दिखाई न देने की वजह से दुर्घटनाएं काफी बढ़ गई हैं। जो संकेतक बचे भी थे उसे अराजकतत्वों ने तोड़ दिया। इन्हें विभाग पुन: स्थापित कराए, जिससे सड़क पर यात्रा सुगम हो सके।