मुंडेरवा। चीनी मिल परिसर में देवी भागवत कथा में आचार्य दयानिधान पांडेय ने कहा कि कथा सुनने से मन, वाणी और विचार में शुद्धता आती है। विवेक जागृत होने से मनुष्य का कल्याण होता है। आचार्य ने बताया कि सत्संग से मानव का विवेक जागृत होता है और यह संसार के समस्त भौतिक सुख-साधनों से कहीं अधिक मूल्यवान है। कहा कि मनुष्य को सदैव अच्छे लोगों के साथ रहना चाहिए और अच्छे विचारों का सत्संग करना चाहिए। अहंकार व्यक्ति को दूसरों को नीचा दिखाने की ओर ले जाता है, जबकि संस्कारयुक्त व्यक्ति सदैव दूसरों का सम्मान करता है। आचार्य ने यह भी कहा कि रिश्ते तभी सच्चे कहलाते हैं जब वे समय पर साथ दें। कमाई की परिभाषा केवल धन तक सीमित नहीं है, बल्कि अनुभव, रिश्ते, प्रेम, सम्मान और सबक भी कमाई का ही स्वरूप हैं। कथा आयोजन में भरत मौर्या, जोखन अग्रहरि, लक्ष्मण मौर्य, रामकेश शर्मा, रमेश, राकेश आदि उपस्थित रहे। संवाद