बस्ती। विद्युत विभाग की गाड़ी जैसे-तैसे घिसट कर चल रही है। क्योंकि संसाधनों की मार झेल रहे विद्युत विभाग में स्थायी कर्मियों की कमी रही सही व्यवस्था को भी खराब कर रही है। शहरी क्षेत्र में सड़क किनारे खुले ट्रांसफार्मर, गली मोहल्लों में उलझे तारों का मकड़जाल व्यवस्था पर धब्बा बन कर रह गया है। सर्दियों में तो लोकल फाल्ट ने ज्यादा मुसीबत नहीं पैदा की, मगर गरमी में शहरी क्षेत्र की व्यवस्था कर्मियों की कमी के चलते लड़खड़ा जाती है। शहर में पुरानी बस्ती, गांधी नगर व अमहट तीन उपकेंद्रों के कुल 11 फीडर हैं। इन सभी फीडरों पर एक-एक लाइनमैन की नियुक्ति है। जबकि करीब पंद्रह हजार उपभोक्ताओं को बिजली के कनेक्शन दिए गए हैं। इनमें व्यापारिक लाइन भी शामिल हैं।
रात में फाल्ट बन जाती है समस्या
शहरी व्यवस्था जिन 11 लाइनमैनों के हवाले है वे इसका संचालन कैसे करते होंगे यह एक सवाल है। सबसे चौंकाने वाली बात तो यह है कि शहर की आपूर्ति व्यवस्था के लिए विभाग को निजी हाथों के भरोसे काम चलाना पड़ रहा है। विद्युत वितरण की व्यवस्था को सुचारु रुप से संचालित करने के लिए 56 ठेका के कर्मियों को तैनात किया गया है। यही कर्मी आपूर्ति व्यवस्था संचालित कर रहे हैं। ऐसे में जब देर रात कहीं कोई लोकल फाल्ट हो जाता है तो जिम्मेदार पसीना छोड़ देते हैं। क्योंकि सरकारी कर्मी उनके पास हैं नहीं और ठेका कर्मी रात में काम करने से रहे।
जर्जर तारों से कई मोहल्लों में आपूर्ति
विभाग ने लाखों रुपये खर्च कर सड़क किनारे के मुहल्लों की लाइन तो ठीक कर दी, मगर आज भी तुरकहिया, मड़वा नगर के संपर्क मुहल्ले, दक्षिण दरवाजा मुख्य मार्ग सहित एक दर्जन मुहल्लों में उलझे तारों के बीच आपूर्ति चल रही है। ऐसे में जब लाइन में कोई फाल्ट आता है तो उसे ठीक करने में घंटो लग जाते हैं।
इनकी सुनिए
उपखंड अधिकारी टाउन मनोज कुमार सिंह कहते हैं कि यह सही है कि स्थायी लाइनमैन जरूरत के मुताबिक नहीं हैं, मगर विभाग ने ऐसे ठेका कर्मियों को संबद्ध कर रखा है जिन्हें लाइन की अच्छी जानकारी है। ऐसे में लोकल फाल्ट होने पर इन कर्मियों को लगा दिया जाता है। रही उलझे तारों से आपूर्ति की बात तो धीरे-धीरे समूचे शहर की तार बदली जा रही है। व्यवस्था को चाक-चौबंद कर दी जाएगी।