बस्ती। त्योहार के बाद भी ट्रेनों में भीड़ कम नहीं हुई थी कि इसी बीच बाराबंकी में यार्ड रिमाडलिंग के चलते मेगा ब्लॉक कर दिया गयाा। इसके चलते 32 ट्रेनें 15 जनवरी तक निरस्त कर दी गई हैं। 52 ट्रेनों का मार्ग परिवर्तन कर दिया गया। ऐसे में यात्रियों को विभिन्न शहरों में लाने ले जाने का सारा दारोमदार रोडवेज की बसों पर आ गया है। वहीं, बसों के भीतर सर्द हवा से यात्रियों को बचाने के इंतजाम नाकाफी हैं। कई बसों की खिड़कियाें में शीशे ही नहीं हैं।
शुक्रवार को बसों की स्थिति जानने के लिए डिपो का जायजा लिया गया। यहां कुछ बसें बेहद खराब स्थिति में मिलीं। कुछ बसों के शीशे बिना रबर के ही फिट कर दिए गए हैं। इन बसों में यात्रा के दौरान मुसाफिर सिहर उठते हैं। वर्कशॉप में चालक-परिचालकों की शिकायतों को नजर अंदाज किया जा रहा है। बस्ती डिपो में करीब 93 पुरानी बसे हैं। इनमें इतनी खामियां हैं कि यह रूट पर चलने लायक नहीं बची हैं।
किसी बस मे बॉडी व फर्श से हवा पास होती है तो किसी के शीशे में यू-पलाक तक नहीं लगे हैं। यात्रियों का कहना है कि खिड़कियों में रबर न होने के कारण जब बस चलती है तो शीशे खुद ही खुल जाते हैं और सुरसुराती हुई हवा अंदर घुस रही है। तमाम बसों में ऑल वेदर बल्ब तक नहीं लगे हैं। इंडीकेटर टूटे हुए हैं। वायरिंग बिखरी हुई है। शासन का निर्देश है कि सर्दी में बसों को रूट पर भेजने से पहले बसों की खामियाें को दुरुस्त कर लिया जाए। शासन के निर्देशानुसार, इंडीकेटर, वाइपर, बॉडी व फर्श के छेद को दुरुस्त कर ही बसें रूटों पर भेजी जाएंगी। डिपो के फोरमैन चंदन लाल ने बताया कि बसों को दुरुस्त कर ही रूट पर भेजा जा रहा है। शीशे, रबर, बॉडी व फर्श को ठीक करने का कार्य युद्धस्तर पर कार्यशाला में चल रहा है।