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Basti News: घर बैठे पा रहे दाम तो केंद्र पर क्यों बेचें किसान गेहूं

Fri, 10 May 2024 02:45 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बस्ती
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वाजिब दाम न मिलने से क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच रहे किसान
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अब तक लक्ष्य के सापेक्ष चार फीसदी हो सकी खरीद

संवाद न्यूज एजेंसी

बस्ती। गेहूं खरीद के लिए जिला प्रशासन व खाद्य विभाग से जुड़े अधिकारी दिन-रात एक कर किसानों के घर तक पहुंच रहे हैं। बावजूद इसके दो माह पूरे होने के बाद भी महज चार फीसदी गेहूं की खरीद हो सकी है। वहीं खरीद में तेजी लाने के लिए शासन-प्रशासन लगातार विभागीय अधिकारियों पर ताबड़तोड़ कार्रवाई कर दबाव बनाए हुए है। जबकि किसानों का कहना है कि जब उन्हें घर बैठे सरकारी दर से अधिक दाम मिल रहा है तो केंद्र पर जाकर समय व धन का नुकसान क्यों करें।



पहली मार्च से गेहूं खरीद चालू है। देर से पकने के कारण किसान अपनी उपज को सजो चुके हैं। गेहूं खरीद के लिए 142 क्रय केंद्र बनाए गए हैं। जिले को 87 हजार एमटी गेहूं खरीदने का लक्ष्य शासन ने निर्धारित किया है। अब तक चार हजार 437 एमटी गेहूं खरीदा जा चुका है, जो लक्ष्य के सापेक्ष सिर्फ चार फीसदी माना जा रहा है।
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15 जून तक चलने वाली गेहूं खरीद के लिए 96 फीसदी लक्ष्य हासिल कर पाना अधिकारियों के लिए चुनौती बन गया है। किसान भी बिचौलियों व आढ़तियों के चक्कर में पड़कर घर बैठे समर्थन मूल्य से अधिक मुनाफा पा रहे हैं और क्रय केंद्रों से दूरी बनाए हुए हैं।



सरकार ने गेहूं का समर्थन मूल्य 2275 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। किसानों के अनुसार उन्हें घर बैठे 2400 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल गेहूं का दाम मिल रहा है। इन्हें उम्मीद है कि पिछले साल की तरह इस बार भी गेहूं की बाजार कीमत 2700 से 2800 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ेगी। यही कारण है कि वह सरकारी केंद्रों पर न पहुंच कर अपनी उपज डंप कर बैठे हैंं।
बहादुपुर ब्लॉक के पोखरनी निवासी राम कमल चौधरी ने बताया कि जब गांव में ही 2400 से 2500 रुपये प्रति क्विंटल मिल रहा है तो अनावश्यक पचड़े में क्यों पड़े। किसान राम भुआल ने बताया कि खाते में समय से धन नहीं पहुंचता है और क्रय केंद्र से लेकर अधिकारियों तक दौड़धूप करनी पड़ती है। निरंजनपुर के किसान रामानुजेंद्र पांडेय ने बताया कि सत्यापन से लेकर तरह-तरह की खानापूरी करने के बावजूद वाजिब दाम नहीं मिल पाता है। इससे नकद बेचने में आसानी होती है।
बेइली-कलवारी के किसान व पूर्व शिक्षक बाबूराम वर्मा ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी भुगतान व गेहूं की गुणवत्ता को लेकर होती है। गुणवत्ता का हवाला देकर परेशान किया जाता है। केंद्र पर गेहूं बेचने के बाद समय से भुगतान नहीं मिल पाता है।
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गेहूं की खरीद में आ रही तेजी

संभागीय खाद्य नियंत्रक दुर्गेश प्रसाद ने बताया कि गेहूं पकने में समय अधिक लगने के कारण खरीदारी देर से शुरू हुई है। अभी किसान उपज को पूरी तरह से सहेजने में लगे हुए हैं। आगे से खरीद में रफ्तार बढ़ेगी और लक्ष्य से अधिक खरीद की जाएगी।
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