बस्ती। खाद्यान्न वितरण और भंडारण के लिए अन्नपूर्णा भवन निर्माण के लिए चिह्नित की जा रही भूमि में बड़ी लापरवाही सामने आ रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय स्तर पर नामित अधिकारी बिना स्थलीय सत्यापन और अन्य जांच किए भूमि चिह्नित कर रिपोर्ट लगाकर आगे की कार्रवाई के लिए अग्रसारित कर दे रहे हैं, जहां भवन बन तो जा रहा है, लेकिन रास्ता नहीं है। इससे राशन कैसे वहां जाएगा, इसको लेकर ग्रामीण चिंतित हैं।
चालू सत्र में जनपद में करीब 150 ग्राम पंचायतों में अन्नपूर्णा भवन बनवाए जाने का लक्ष्य शासन स्तर से जारी किया गया है। अन्नपूर्णा भवन बनवाए जाने पर करीब 12 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। लेकिन, इसमें ढिलाई की बात सामने आई है। बताया गया कि बहादुरपुर क्षेत्र में कई गांव में ऐसे जगहों पर अन्नपूर्णा भवन बन गए हैं और बनवाए जा रहे हैं जहां पर जाने के लिए रास्ता नहीं है। चारों ओर खेत है, सिर्फ मेड़ के जरिये ही वहां तक पहुंच सकते हैं।
हालांकि, स्थानीय स्तर पर जांच के बाद जो भूमि चिह्नित करके दी गई है, उस पर मनरेगा, आरईडी और जिला पूर्ति विभाग निर्माण करवा रहा है। बताया गया कि कुछ भवन तैयार भी हैं, जिसे जल्द हैंडओवर भी कर दिया जाएगा। लेकिन, उसके बाद संकट रास्ते का खड़ा हो जाएगा। वहां तक राशन कैसे जाएगा। लोग वहां से राशन कैसे उठाएंगे, इसको लेकर अभी से संकट देखने को मिल रहा है। जानकारों ने बताया कि कमीशन के लालच में बिचौलिए गलत जगह पर जमीन चिह्नित करवा दे रहे हैं।
43 भवनों के राह में अड़चन : बहादुरपुर दो, बनकटी एक, बस्ती सदर सात, दुबौलिया तीन, गौर चार, हर्रैया तीन, कप्तानगंज एक, कुदरहा आठ, परशुरामपुर तीन, रामनगर एक, रुधौली पांच, सल्टौआ एक, सांऊघाट एक व विक्रमजोत में तीन गांव ऐसे हैं जहां अन्नपूर्णा भवन के निर्माण में भूमि अड़चन है, ऐसे में यहां अब फिर से कार्रवाई होगी।