मौसम: तापमान गिरा, बुखार का पारा चढ़ा
- तीन दिन में तापमान में तीन डिग्री की गिरावट
- जिला अस्पताल में भर्ती हुए बुखार के दस मरीज
बस्ती। दिवाली के बाद तीन दिनों में तापमान में तीन डिग्री सेल्सियस की गिरावट आई है। तापमान गिरने के साथ ही बुखार का पारा भी चढ़ने लगा है। जिला अस्पताल की ओपीडी में बुखार पीड़ितों की संख्या दोगुनी हो गई है।
मौसम सर्द-गर्म है, जबकि सुबह-शाम मौसम ठंडा है। वहीं दिन में गर्मी महसूस की जाती है। मौसम का ये मिजाज सेहत को रास नहीं आ रहा है। यही वजह है कि लोगों में तेजी से वायरल इंफेक्शन हो रहा है
आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय कुमारगंज अयोध्या के मौसम विज्ञानी डॉक्टर अमरनाथ मिश्र ने बताया कि दिवाली के पहले न्यूनतम तापमान 21-22 डिग्री सेल्सियस था, जो कि बृहस्पतिवार से गिरकर 18 डिग्री सेल्सियस पर आ गया है। वहीं अधिकतम तापमान 32 डिग्री से 30 डिग्री हो गया है। शाम पांच बजे के बाद तापमान 25 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जा रहा है। जिससे सिहरन महसूस हो रही है। ओस भी अब तेज पड़ने लगी है।
फिजिशियन डॉ. रामजी सोनी का कहना है कि गुलाबी जाड़े में बच्चे ब्रॉकाइटिस के शिकार हो रहे हैं। सुबह-शाम ठंडक से बच्चे बीमारी की जद में हैं। संक्रमण अधिक होने पर बुखार से पीड़ित बच्चों को सांस लेने में दिक्कत हो रही है। ऐसे मरीजों की संख्या सरकारी और निजी अस्पतालों में दोगुनी हो गई है। ब्रॉकाइटिस के शिकार मासूमों को सांस लेने में दिक्कत होती है। चार से छह महीने के बच्चों के लिए ये लक्षण खतरनाक है। इसे हल्के में न लें। वहीं मच्छरों का प्रकोप बढ़ने से डेंगू का खतरा भी बढ़ गया है। बृहस्पतिवार को संदिग्ध डेंगू से एक मरीज की मौत भी हो चुकी है।
डेंगू के लक्षण
ठंड लगने के साथ अचानक तेज बुखार चढ़ना, सिर, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होना आंखों के पिछले भाग में दर्द होना, जो आंखों को दबाने या हिलाने से और भी बढ़ जाता है अत्यधिक कमजोरी लगना, भूख न लगना, जी मिचलाना मुंह का स्वाद खराब होना, गले में हल्का दर्द होना, दुखी या बीमार महसूस करना, शरीर पर लाल रैश का होना, चेहरे, गर्दन या छाती पर विसारित दानों की तरह ददोरे हो सकते हैं।
--------------
डेंगू होने पर डॉक्टर की सलाह
डॉक्टरों की सलाह पर पैरासिटामॉल की गोली लें। मरीज को डिसप्रिन या एस्प्रिन न दें। अगर बुखार 102 डिग्री से अधिक है, तो बुखार कम करने के लिए हाइड्रोथेरेपी (गीले कपड़ेे की पट्टी सिर पर रखना) करें। सामान्य रूप से भोजन देना जारी रखें। मरीज को आराम करने दें।