बस्ती। पश्चिमी विक्षोभ के लगातार सक्रिय होने से पहाड़ों पर बर्फबारी और दिल्ली में बारिश का पूर्वी यूपी में 24 घंटे के भीतर असर दिख जाएगा। आसमान में छाए बादल साफ इशारा कर रहे हैं कि बिना धरती भिगोए वे लौटने वाले नहीं हैं।
मौसम विज्ञानियों ने सेटेलाइट के आंकड़ों के आधार पर अलर्ट किया है। हवाओं के मौजूदा सिस्टम में अनुमान है कि इस बार बिना बरसे बादलों की खुमारी मिटने वाली नहीं है। बुधवार, शुक्रवार और शनिवार को बस्ती मंडल में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। अनुमान तो यहां तक है कि यदि हवाओं की चाल में बड़ा उलटफेर नहीं हुआ तो 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के कार्यक्रम के दौरान बदली के बीच बूंदाबांदी हो सकती है। आचार्य नरेंद्र देव कृषि विश्वविद्यालय कुमारगंज फैजाबाद के पूर्व मौसम विभागाध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश ह्वेदर एंड क्राफ एडवाइजरी कमेटी के सदस्य डॉ. पद्माकर त्रिपाठी के अनुसार वेस्टर्न डिस्टर्वेंस (पश्चिमी विक्षोभ) के कारण हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर में जबरदस्त बर्फबारी हो रही है। जिसका 24 घंटे में असर यहां परिलक्षित होने लगेगा। 29 जनवरी तक अधिकतम तापमान 21 और न्यूनतम आठ डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
इधर, विक्षोभ के कारण आसमान में घने बादल बन रहे हैं। हालांकि, अभी हवाएं उनका साथ नहीं दे रही हैं। मंगलवार को 15 से 25 किमी प्रतिघंटे रफ्तार से उत्तर-पूर्वी हवा चलती रही। इसके कारण धूप होने के बावजूद तापमान में गिरावट नहीं हुई। मगर अनुमान है कि मंगलवार/बुधवार रात हवा का रुख बदलेगा। प्रबल संभावना है कि बुधवार को बस्ती के अलावा फैजाबाद जिले के पूर्वी एरिया से लेकर सिद्धार्थनगर व संतकबीरनगर जिले के तराई व बस्ती-गोरखपुर मंडल के अन्य जिलों में बरसात हो सकती है।
इस हफ्ते अनुुमानित तापमान
23 जनवरी बुधवार अधिकतम 23 न्यूनतम 12
24 जनवरी बृहस्पतिवार अधिकतम 23 न्यूनतम 12
25 जनवरी शुक्रवार अधिकतम 21 न्यूनतम 12
26 जनवरी शनिवार अधिकतम 20 न्यूनतम 08
27 जनवरी रविवार अधिकतम 21 न्यूनतम 08
28 जनवरी सोमवार अधिकतम 21 न्यूनतम 07
(नोट- हवाओं में बड़ा उलटफेर होने पर आंकड़ों में परिवर्तन संभावित है।)
फसलों के लिए संजीवनी होगी बारिश
अब तक की पूरी ठंड के दौरान एक बार भी बारिश न होने से फसलों की रंगत गायब है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. एसएन सिंह के अनुसार बारिश होने से गेहूं के कल्लों में बूंदें भर जाती हैं। इससे बालियों में दाने बनने की प्रक्रिया तेज हो जाती है। इन वक्त फसल को यदि हल्की बारिश मिल गई तो फसल के लिए संजीवनी साबित होगी।