बस्ती/ दुबौलिया। पिछले 38 घंटे से सरयू नदी का जलस्तर स्थिर बताया जा रहा है। फिर भी पानी का बहाव लाल निशान से ऊपर हैं। केंद्रीय जल आयोग अयोध्या के अनुसार खतरे के निशान 92.73 मीटर से 25 सेंटीमीटर ऊपर होकर नदी प्रवाहित हो रही है। गांवों में बाढ़ का दहशत अभी बरकरार है।
मैरुंड गांव सुविका बाबू के लोगों की दुश्वारियां अभी कम नहीं हुई है। प्रशासन ने यहां के लोगों के आवागमन के लिए सात नांवों की व्यवस्था की है। हालांकि रविवार का दिन होने के कारण स्कूली बच्चों की ज्यादा आवाजाही नहीं देखी गई। केवल नागरिक अपनी दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए नाव पर बैठकर आ-जा रहे थे। सुविका बाबू गांव में पानी लगने से संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ गया है। पशुचारे का संकट भी बरकरार है।
कटरिया- चांदपुर तटबंध पर खजांचीपुर गांव से लेकर खलवा गांव तक तटबंध पर दबाव बना हुआ है। गौरा-सैफाबाद तटबंध पर टकटकवा गांव से लेकर दलपतपुर गांव के सामने तक दबाव बना हुआ है। गौरा-सैफाबाद तटबंध के एसडीओ हरिश्चंद्र ने बताया कि जलस्तर स्थिर है। तटबंध पर हालत सामान्य है। बाढ़ चौकी सक्रिय है।
मईपुर गांव में हो रही कटान, ग्रामीण परेशान
गायघाट। सदर तहसील के कुदरहा ब्लाॅक के बैड़ारी एहतमाली में मईपुर बड़का पुरवा के ग्रामीणों के लिए सरयू नदी आफत बन गई है। यहां एक पखवाड़े के भीतर दोबारा कटान होने लगी है। नदी का जलस्तर स्थिर भले है, लेकिन फसल और कृषि योग्य जमीन तेज धारा में विलीन होती जा रही है। किसान इस बर्बादी को देखकर चिंतित हैं। नदी कटान करते हुए गांव की तरफ लगातार रुख कर रही है। ग्रामीणों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। अब उन्हें पुश्तैनी घर बचाने की चिंता सताने लगी है। रविवार को मईपुर गांव निवासी गंगाराम यादव के घर से दक्षिण उनके आठ बीघे गन्ने के खेत में कटान होने लगी।
उन्होंने बताया कि इस बार बाढ़ में एक बीघा गन्ने की फसल सरयू नदी में समाहित हो गई। बाकी बचे खेत में भी कटान हो रही है। बगल में ओम प्रकाश पासवान का दो बीघा धान की फसल कटान में बह गई। इसी तरह कई किसानों की उपजाऊ भूमि व पेड़ पौधे कटान में बह जा रहे हैं। कटान इसी तरह होता रहा तो गांव बहने का खतरा है। गंगाराम यादव, जानकी देवी, राम अवध, धर्मराज, ओमप्रकाश पासवान, परशुराम यादव आदि लोगों ने बताया कि इस बार सरयू नदी ने सैकड़ों बीघा जमीन अपने आगोश में ले लिया है, जिससे कुछ किसान भूमिहीन भी हो गए हैं। यहां कई साल से ड्रेजिंग मशीन से नदी की धारा मोड़ने की आवाज उठाई जा रही है। मगर जिम्मेदारों का ध्यान इस ओर नहीं है।