धनवान बनने की चाह में जरायम की दुनिया में फिरोज ने रखा था कदम
नीरज श्रीवास्तव/राज प्रकाश
बस्ती। आईसीआईसीआई बैंक लूटकांड का मास्टर माइंड इलाहाबाद के धूमनगंज थानाक्षेत्र निवासी फिरोज पठान धनवान बनने की चाह में जरायम की दुनिया में कदम रखा था। वर्ष-2011 में पहली बार वह सूरत में विजय कश्यप के साथ गिरफ्तार हुआ था। उसे वहां की पुलिस ने आर्म्स एक्ट में चालान किया गया था। हालांकि बाद में पर्दाफाश हुआ कि फिरोज एवं विजय ज्वेलरी लूटकांड को अंजाम देने आए थे, मगर घटना को अंजाम देने से पहले पुलिस ने पकड़ लिया था।
इसके बार पहली बार पुलिस रिकार्ड में फिरोज एवं विजय का नाम दर्ज हुआ। आर्म्स एक्ट में जमानत के बाद दोनों मुंबई पहुंच गए। यहां उसने कई घटनाओं को अंजाम दिया। पुलिस ने अनुसार पांच मुकदमे फिरोज पर बस्ती और मुंबई तक दर्ज है। वह युवाओं को धनवान बनाने का लालच देकर गिरोह में शामिल गरता था और बड़ी लूट की घटनाओं को अंजाम देकर फरार हो जाता था।
पुलिस के अनुसार एक दशक तक फिरोज उर्फ इरफान पठान की धमक पूर्वांचल ही नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों में थी। बस्ती के भीड़भाड़ वाले इलाके मालवीय मार्ग पर आईसीआईसीआई बैंक लूटकांड कर इन बदमाशों ने पुलिस को खुली चुनौती दे दी थी। घटना के बाद से पुलिस एवं एसटीएफ पूरी घटना का अध्ययन करने के बाद इस नतीजे पर पहुंची थी कि फरेंदा एवं टांडा में हुए लूट कांड जैसी यह घटना है। इसके बाद एसटीएफ व पुलिस मामले की तह में जाने के लिए देश के कई हिस्सों में नेटवर्क खड़ा कर पर्दाफाश का प्रयास शुरू किया। पुलिस प्रयास का नतीजा रहा है कि आईसीआईसीआई बैंक लूटकांड में शामिल सात आरोपी गिरफ्तार हुए। इसके मास्टर माइंड फिरोज पठान का सहयोगी सलमान एवं विजय कश्यप भी पकड़ गए। घटना को अंजाम देने के बाद फिरोज मुंबई के अड्डे पर छिप गया, मगर जब उसे यह पता चला कि पुलिस को उसके ठिकाने का पता चल गया है तो वह वहां से निकलकर लालगंज थानाक्षेत्र के महादेवा पहुंच गया, जहां से वह आंबेडकरनगर होते हुए वाराणसी एवं इलाहाबाद जाना चाहता था । फिलहाल उसे इसमें सफलता नहीं मिली और पुलिस ने मुुठभेड़ में मारा गया।
डान बनने की राह पर चल रहा था
महादेवा/लालगंज। पुलिस मुठभेड़ में मारा गया बैंक लूटकांड का मास्टर माइंड फिरोज उर्फ इरफान पाठन डान बनने की राह पर चल रहा था। वह अपना नेटवर्क देश के विभिन्न हिस्सों में धीरे-धीरे फैला रहा था। लूट, फिरौती, अपहरण, हत्या जैसे अपराधों में उसकी संलिप्ता थी। एसटीएफ के सीओ डीके शाही ने बताया कि जिस जगह पर वह घटना को आंजाम देता था, सबसे पहले उस स्थान के बेरोजगारों युवकों का वह ब्रेनवास करता था। युवक जब उसके झांसे में आ जाते थे, तब वह घटना को अंजाम देता था। उस तक पुलिस न पहुंच सके, इसके लिए वह युवकों को उनके हाल पर छोड़ देता था। इसके बाद युवक पुलिस के हत्थे चढ़ जाते थे और फिरोज दूसरी जगह पर नए बेरोजगारों को तैयार करता था। बेरोजगारों पर अपना प्रभाव दिखाने के लिए वह उन पर खूब रुपये खर्च करता था। सीओ ने बताया कि सूरत, कौशांबी, महराजगंज, प्रयागराज, सिद्धार्थनगर, मुंबई सहित अन्य जनपदों में फिरोज वांछित था। उसकी गिरफ्तारी के लिए एसटीफ ढाई माह से लगी थी।