मेडिकल कॉलेज में मरीजों की संख्या बढ़ने से समय पर नहीं हो पा रही जांच
-तीन में से दो मशीनें खराब होने के चलते मिल रही लंबी डेट
संवाद न्यूज एजेंसी
बस्ती। जिले के मेडिकल कॉलेज में अल्ट्रासाउंड कराना आसान नहीं है। यहां एक दिन नंबर लगाइए तो अगले माह बाद अल्ट्रासाउंड हो पाएगा। इसका लाभ निजी सेंटर संचालक उठा रहे हैं। मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के अल्ट्रासाउंड सेंटर का जायजा लिया गया। यहां भीड़ लगी थी, लोग अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। मगर पर्चा भेजने के बाद जब नंबर आता था तो अंदर से उन्हें बुलाकर तारीख बता दी जाती थी।
मेडिकल कॉलेज में रेडियोलॉजिस्ट विभाग में नंबरिंग का यह कार्य एक-दो नहीं बल्कि कई माह से चल रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि भीड़ के चलते यह स्थिति हुई है। जिलेभर के मरीज यहीं जांच कराना चाहते हैं। ऐसे में नंबर लगा दिया जाता है।
सीएमएस डॉ. एएन प्रसाद ने कहा कि यहां नियमानुसार सबसे पहले इमरजेंसी में भर्ती मरीजाें, वार्ड में भर्ती मरीज और इसके बाद अस्पताल में डॉक्टर की ओर से दिए गए सुझाव वाले मरीजों का अल्ट्रासाउंड होता है। बताया कि यहां केवल एक मशीन है। पुरानी दोनों मशीनें खराब हैं। इनकी मरम्मत के लिए कंपनी को पत्र लिखा गया है।
सोनूपार से अस्पताल में मरीज को लेकर आए बनवारी ने कहा कि उनके रिश्तेदार काे डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड लिखा है, मगर यहां तो अल्ट्रासाउंड होने की उम्मीद नहीं दिख रही है। 27 मई को अल्ट्रासाउंड की तिथि दी गई है। ऐसे में बाहर ही कराना मजबूरी है।
संतकबीर नगर से आए मरीज के तीमारदार राघवराम ने कहा कि उन्होंने यहां अपने पिता को डॉक्टर से दिखाया है। उन्हें पेट में दिक्कत है, मगर अल्ट्रासाउंड संभव नहीं है। सुबह से लाइन लगाए थे, बताया गया है कि अभी यहां नंबर नहीं मिल रहा है। देर हो गई है। अब कल आइएगा।
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700 रुपये में बाहर होती है जांच
- अल्ट्रासाउंड अस्पताल में निशुल्क होता है, मगर निजी सेंटरों पर इसके लिए मरीज को 700 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इसके अलावा कुछ विशेष जांच के लिए हजार रुपये तक भी देना पड़ जाता है।