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सवा करोड़ खर्च, टंकी सात साल से बेपानी

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बेकार पड़ी पानी की टंकी। - फोटो : amar ujala
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कलवारी।
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करीब नौ साल पहले गांव के कई बच्चे जलजनित बीमारियों की चपेट में आ गए थे। डॉक्टरों ने उस समय प्रदूषित पानी को कारण बताया था। इसके बाद लोगों को शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए व्यवस्था हुई। सवा करोड़ रुपये खर्च करने के बाद भी आज तक गांववालों को टोटी का पानी नहीं मिल सका।
 बहादुरपुर ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत कलवारी मुस्तहकम की आबादी करीब आठ हजार है। वर्ष 2008-09 में गांव में पेट संबंधी बीमारियों के अलावा बुखार और खसरे के चपेट में 50 से अधिक बच्चे आ गए थे। डॉक्टरों ने इन बीमारियों का कारण प्रदूषित पानी बताया था। इसके बाद पानी की जांच में भी रिपोर्ट सही पाई गई। गांववालों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए जल निगम निर्माण खंड प्रथम की ओर से वर्ष 2009-10 में एक करोड़ 25 लाख की लागत से काम शुरू कराया गया। वर्ष 2011 में पानी की टंकी बन कर तैयार हो गई। ग्राम पंचायत के सभी घरों तक पानी पहुंचाने के लिए लगभग 22 किलोमीटर पाइप का जाल बिछाया गया लेकिन सात वर्ष के बाद भी टोटी में पानी नहीं आ सका है।
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गांववालों ने सुनाई पीड़ा
गांव के अमर बहादुर सिंह ने कहा कि सात वर्ष से पानी का इंतजार है लेकिन विभाग के कर्मचारियों की उदासीनता के कारण टंकी से पानी की सप्लाई शुरू ही नहीं हो सकी। जबकि गांव में लगे इंडिया मार्क-2 हैंडपंप भी पीला पानी दे रहे हैं। जो बोरिंग कराने में सक्षम हैं वे तो आरओ तक लगवा चुके। गरीब जन प्रदूषित पानी ही पी रहे हैं।
 हेमंत चौरसिया ने बताया कि जब इस योजना को मंजूरी मिली थी तो लगा कि अब हम लोगों को भी शहरों की भांति सप्लाई से पानी मिलेगा लेकिन इतना दिन बीत जाने से उमीद खत्म होती जा रही है। पानी सप्लाई शुरू होती तो एक हजार लोग वाटर कनेक्शन ले लेते। इससे विभाग को भी 20 हजार रुपये प्रति माह की आमदनी होती। 
बाजार में रहने वाली शांति देवी ने का कहना है कि टोटी का पानी क्यों नहीं मिल पाया यह मालूम नहीं है। लेकिन सरकारी नल भी दूषित जल उगल रहे हैं। हालत यह कि हर रोज 20 रुपये में एक डिब्बा मिलने वाला पानी खरीद कर पूरा परिवार पी रहे हैं। हैंडपंप के पानी से गैस और अन्य बीमारी हो जा रही है। साफ पानी आम जरूरत है।
 ग्राम प्रधान के प्रतिनिधि संतोष उर्फ गुड्डू सिंह का कहना है कि जब से मेरी पत्नी पुष्पा सिंह प्रधान हुईं तभी से मैं लगातार पानी की सप्लाई शुरू कराने का प्रयास कर रहा हूं लेकिन जल निगम में सुनवाई नहीं होती है। विभागीय लापरवाही के कारण योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इसकी शिकायत भी बीडीओ से की गई।
जवाब नहीं दे सके विभाग के जेई
जब पूछा गया कि हाईवे निर्माण कार्य 2015 में शुरू हुआ है जबकि टंकी निर्माण 2011 में ही पूरा हो गया था तो सप्लाई क्यों नहीं तो जल निगम के अवर अभियंता गिरिराज ने बताया लुंबनी-दुद्धी मार्ग हाईवे बना रहा है। इसके कारण कई जगह पाइप क्षतिग्रस्त हो चुका है। ऐसे हालात में पानी की सप्लाई शुरू नहीं हो पा रही है। 
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विभाग को भी हो रही राजस्व क्षति
 एक करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से 2011 में टंकी बन गई। 22 किलोमीटर पाइपलाइन भी बिछा दी गई लेकिन आज तक किसी को कनेक्शन नहीं दिया गया। विभाग के जिन कर्मचारियों पर राजस्व बढ़ाने का जिम्मा है उन्हीं की लापरवाही से आठ हजार आबादी वाले इस गांव में कनेक्शन नहीं हो सका। जबकि करीब एक हजार से अधिक लोग कनेक्शन लेने के इच्छुक थे। एक वाटर कनेक्शन का प्रतिमाह चार्ज 20 रुपये है। सात वर्ष बाद भी परिणाम शून्य है।
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